जयपुर के श्री दादू दयाल महासभा के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनका इस्तेमाल करने के मामले में तीन आरोपियों को मोती डूंगरी थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया। आरोपियों पर महासभा की बैठक की फर्जी मिनट्स तैयार करने, सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर करवाने और रजिस्ट्रार कार्यालय में दस्तावेज पेश कर प्रमाण पत्र हासिल करने का आरोप है। पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने तीन आरोपी कालिदास स्वामी (45) निवासी एएसजीएम नगर रीको कांटा सांगानेर, मुकेश कुमार स्वामी (52) निवासी छोटी जमात वार्ड नम्बर 6 लालसोट और नरेंद्र पंथी (56) निवासी मकान नम्बर 6 नया 1117 राजस्व गांव छत्रबाग इंदौर मध्यप्रदेश को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 2 दिन पहले तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। इस पर कोर्ट ने एक दिन की पुलिस रिमांड दी थी। वहीं आरोपियों को शुक्रवार को फिर कोर्ट में पेश किया गया। आरोपियों ने जमानत अर्जी लगाई, लेकिन जमानत खारिज कर कोर्ट ने उन्हें ज्यूडिशल कस्टडी (जेल) भेज दिया। मोती डूंगरी थानाधिकारी मोहन सिंह ने कहा- आरोपियों के साथ मिलीभगत करने वाले अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। बैठक की कार्यवाही में फर्जी हस्ताक्षर करवाने का आरोप डीसीपी ईस्ट रंजिता शर्मा ने बताया- परिवादी ने शिकायत में बताया कि आरोपियों ने अन्य व्यक्तियों के साथ मिलीभगत कर 30 जुलाई 2025 को श्री दादू दयाल महासभा मोती डूंगरी जयपुर की फर्जी बैठक दर्शाई। इस बैठक की कार्यवाही विवरणिका तैयार कर उस पर एक व्यक्ति सहित महासभा के सदस्यों और अन्य लोगों के फर्जी हस्ताक्षर करवाए गए। आरोप है कि इन दस्तावेजों को महासभा की वास्तविक कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करते हुए रजिस्ट्रार कार्यालय जयपुर में पेश किया गया। दस्तावेज के आधार पर कार्यालय को गुमराह कर प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया। 3 नवंबर 2025 को हुई घटना के बाद सामने आया मामला शिकायत के अनुसार- 3 नवंबर 2025 को नरैना धाम में महंत गोपालदास महाराज के निर्वाण दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में हस्ताक्षर रजिस्टर की फोटोकॉपी कराई गई। इसके बाद 30 जुलाई 2025 की तारीख दिखाकर महासभा की फर्जी बैठक की कार्रवाई तैयार किए जाने और रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रस्तुत करने का आरोप लगाया गया। पुलिस के मुताबिक- इस कार्रवाई में अविश्वास प्रस्ताव से संबंधित विवरण भी शामिल था। आरोपियों की ओर से तैयार दस्तावेज संस्था के संविधान और निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत बताए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस फर्जीवाड़े में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे। अरबों रुपए की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने का दावा श्री दादू दयाल महासभा को ऐतिहासिक, सामाजिक और धार्मिक संस्था बताते हुए शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि संस्था की करोड़ों-अरबों रुपए की अचल संपत्तियों से जुड़े मामलों में कथित फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं। संस्था के खिलाफ लगातार गतिविधियां की जा रही हैं।