देशभर के शिल्पकारों की उत्कृष्ट हस्तकलाएं इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। एक ही छत के नीचे राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त आर्टिजनों की बेहतरीन कलाकृतियों के साथ विभिन्न राज्यों के पारंपरिक हस्तशिल्प का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। प्रदर्शनी में न केवल भारतीय कला और संस्कृति की झलक दिखाई दे रही है, बल्कि हस्तशिल्प को बढ़ावा देने और कारीगरों को नया बाजार उपलब्ध कराने का भी प्रयास किया जा रहा है। दरअसल, इन दिनों जयपुर के जवाहर कला केंद्र के साउथ विंग में कला, शिल्प और भारतीय हस्तकला की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराने वाला आर्ट एंड क्राफ्ट फेयर आयोजित किया जा रहा है। इस मेले में देश के कई राज्यों से आए शिल्पकारों और कारीगरों ने अपनी पारंपरिक एवं हस्तनिर्मित कलाकृतियों का प्रदर्शन किया है। कला प्रेमियों के लिए यह आयोजन भारतीय हस्तशिल्प, लोककला और पारंपरिक शिल्पकला की विविधता को एक ही स्थान पर देखने का अनूठा अवसर बन गया है। मेले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें राष्ट्रीय पुरस्कार (नेशनल अवॉर्ड) से सम्मानित कलाकारों ने भी अपनी उत्कृष्ट कृतियों को प्रदर्शित किया है। वर्षों की साधना और पारंपरिक तकनीकों से तैयार किए गए उनके उत्पाद न केवल भारतीय कला की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भी देश की पारंपरिक शिल्पकला से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। पहले देखिए, आर्ट एंड क्राफ्ट फेयर के PHOTO'S हैंडलूम उत्पाद समेत कई लोक शिल्प बने आकर्षण का केंद्र फेयर में राजस्थान सहित गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, बिहार, जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों के शिल्पकार भाग ले रहे हैं। यहां हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुएं, पारंपरिक पेंटिंग्स, लकड़ी की नक्काशी, धातु शिल्प, मिट्टी की कलाकृतियां, हैंडलूम उत्पाद, ब्लॉक प्रिंट, टेक्सटाइल, हस्तनिर्मित ज्वेलरी, होम डेकोर आइटम और विभिन्न लोक शिल्प आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। लोग खरीदारी के साथ शिल्पकारों से सीधा कर रहे संवाद प्रदर्शनी में आने वाले आगंतुक केवल उत्पादों की खरीदारी ही नहीं कर रहे, बल्कि शिल्पकारों से सीधे संवाद कर उनकी कला, तकनीक और परंपरा के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं। इससे कलाकारों को अपने उत्पादों का बेहतर बाजार मिलने के साथ-साथ उनकी कला को नई पहचान भी मिल रही है। आयोजकों का कहना है कि इस मेले का उद्देश्य पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और लोककलाओं को बढ़ावा देना, शिल्पकारों को सीधा मंच उपलब्ध कराना और लोगों को 'वोकल फॉर लोकल' और 'हैंडमेड इन इंडिया' जैसी अवधारणाओं से जोड़ना है। ऐसे आयोजन स्थानीय और पारंपरिक कारीगरों की आजीविका को मजबूत करने के साथ-साथ भारतीय कला और संस्कृति के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।