जयपुर के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में 2 साल में 100 से ज्यादा मिर्गी से ग्रसित मरीजों का इलाज किया। इन मरीजों की एपिलेप्सी सर्जरी करके उन्हें नया जीवन दिया है। महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज में न्यूरो साइंसेज डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ बी.एस. शर्मा ने बताया- अस्पताल में 5 महीने के बच्चे से लेकर 50 साल तक की उम्र के मरीज की सफल सर्जरी की जा चुकी है। उन्होंने बताया- इतने कम समय में इतने मरीजों को नई जिंदगी दी गई। उन्होंने बताया- जिन मरीजों में दो या दो से ज्यादा दवाइयों के उपयोग के बावजूद मिर्गी के दौरे कंट्रोल नहीं होते, उनके लिए एपिलेप्सी सर्जरी प्रभावी इलाज है। हॉस्पिटल में हर मरीज का विस्तृत प्री-सर्जिकल मूल्यांकन विशेषज्ञों की टीम के जरिए किया जाता है। टीम में पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अजय गोयनका, न्यूरोलॉजिस्ट और मिर्गी रोग विशेषज्ञ डॉ. बलवीन सिंह सहित अनेक विशेषज्ञ शामिल हैं। अब तक 30 बच्चों की सर्जरी डॉ. अजय गोयनका, डॉ. बलवीन सिंह ने बताया- हमारी सर्जरी की सक्सेस रेट का सबसे बड़ा प्रमाण वे मरीज हैं, जिनका जीवन पूरी तरह बदल चुका है। जन्मजात मस्तिष्क विकृति से पीड़ित 5 महीने के शिशु की सफल सर्जरी के बाद वह अब पूरी तरह दौरा-मुक्त है। इसी तरह जन्म से ही मस्तिष्क की खराबी के कारण मिर्गी से पीड़ित 6 साल के एक बच्चे की सर्जरी की। अब तक लगभग 30 बच्चों की सर्जरी की है। दवाइयां बंद, सामान्य जीवन पर लौटै डॉक्टर ने बताया- मेसियल टेम्पोरल स्क्लेरोसिस से पीड़ित 21 साल की युवती को कई साल से बार-बार दौरे आते थे। हमने उसकी सर्जरी की और वह सफल रही। इसके बाद अब वह पूरी तरह दौरा-मुक्त हो गई और उसकी दवाइयां भी बंद हो गईं। इसी तरह 40 वर्षों से मिर्गी से पीड़ित 50 साल मरीज की भी सर्जरी के बाद वह सामान्य जीवन में लौट आया।