राजस्थान की लोक संस्कृति की खुशबू अब रूस तक पहुंचेगी। जयपुर की बहू सीमा राठौड़ रूसी नेशनल बैले ‘कोस्त्रोमा’ के 35वें वर्षगांठ समारोह में राजस्थानी लोकनृत्य रजवाड़ी घूमर की प्रस्तुति देंगी। केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी ने उन्हें चार सदस्यीय भारतीय कलाकार दल में सलेक्ट किया है। 28 अक्टूबर को रूस के कोस्त्रोमा शहर स्थित गुबेरन्स्की कॉन्सर्ट एंड एग्जीबिशन सेंटर में आयोजित होने वाले समारोह में सीमा अपनी कला के माध्यम से राजस्थान की समृद्ध लोक परंपरा का प्रतिनिधित्व करेंगी। राजस्थान की संस्कृति को देश-विदेश तक पहुंचा रही सीमा सीमा राठौड़ रजवाड़ी घूमर को ट्रेडिशनल स्वरूप में संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने इस उद्देश्य से पिंकसिटी में भाव कला नृत्य एकेडमी की शुरुआत की और इसके माध्यम से राजस्थान के लोक नृत्य को देश-विदेश में पहचान दिलाने का प्रयास किया है। उनकी पहल की खास बात यह है कि वे नृत्य प्रशिक्षण को केवल मंचीय प्रस्तुति तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि पारंपरिक लोक कला की बारीकियों, गीत-संगीत और सांस्कृतिक भावभूमि से भी लोगों को परिचित कराती हैं। उनसे पांच साल की बालिका से लेकर 60 साल की महिलाएं भी रजवाड़ी घूमर की ट्रेनिंग ले रही हैं। 15 साल पहले सोशल मीडिया पर शुरू किया था कैंपेन सीमा राठौड़ ने बताया कि उन्होंने 15साल पहले रजवाड़ी घूमर को लोकप्रिय बनाने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जोड़ना शुरू किया। पनिहारी गीतों पर उनके घूमर वाले वीडियो को लाखों व्यूज मिले हैं। वे विदेशी स्टूडेंट्स को घूमर सिखा चुकी हैं। हजारों महिलाओं और बालिकाओं को रजवाड़ी घूमर की ट्रेनिंग दे चुकी हैं। वे यूरोप के कई शहरों के लोगों को ऑनलाइन रजवाड़ी घूमर की बारीकियां सिखा चुकी हैं। फ्रांस से आए मेहमानों ने उनकी एकेडमी का दौरा कर राजस्थानी लोक नृत्य को करीब से समझा था। स्टूडेंट्स को लोकगीतों की जानकारी भी देती हैं सीमा सीमा राठौड़ ने बताया कि रजवाड़ी घूमर राजपूती पोशाक के साथ मांड और राजस्थानी लोकगीतों पर होता है। लोकगीतों का प्रत्येक शब्द अपनी जीवनशैली की भावना को अभिव्यक्त करता है। यही वजह है कि वे घूमर के साथ पनिहारी और लहरियां जैसे पारंपरिक लोकगीतों की जानकारी भी ट्रेनिंग के दौरान देती हैं। सीमा ने राजस्थानी गीतों के एल्बम में अपने नृत्य की प्रस्तुतियां दी हैं। सीमा राठौड़ पहली बार रजवाड़ी घूमर को विदेशी भूमि पर प्रस्तुत करेंगी। रूस में वर्कशॉप भी करेंगी। रूस में होने वाले समारोह में सीमा राठौड़ के साथ कुचिपुड़ी कलाकार वसंत किरण रयासम, कथक कलाकार मेघारंजनी मेधी और लद्दाख की लोक कला से जुड़ी चुश्क अंगमो भी भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगी।