जयपुर के सेंट एंजेला सोफिया सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे होने पर शताब्दी समारोह मनाया। 26 अक्टूबर को शाम 5 बजे हुए मुख्य कार्यक्रम में स्कूल की पूर्व स्टूडेंट्स, टीचर्स और पूर्व प्रिंसिपल शामिल हुए। समारोह में 1936 बैच की स्टूडेंट्स, टीचर्स, और स्टाफ को भी आमंत्रित किया गया। तीन दिन तक चले कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, सामाजिक सेवा से जुड़ी गतिविधियों और 10 मंजिला केक काटने जैसे कार्यक्रम हुए। कई पीढ़ियां एक साथ शताब्दी समारोह में स्कूल से जुड़ी कई पीढ़ियों की स्टूडेंट्स और टीचर्स एक साथ जुटे। पुरानी यादें ताजा होने पर कुछ भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू निकल आए। समारोह के दौरान स्कूल परिसर में 100 साल पूरे होने के प्रतीक के रूप में बड़ा '100' लगाया गया। समारोह 24 से 27 अक्टूबर तक चला। देखें सेंटेनरी के कुछ पल… बिशप कॉमोंट और मदर मैरी मैटिल्डा ने रखी नींव सेंट एंजेला सोफिया स्कूल की शुरुआत के पीछे फ्रांस के मिशनरी पादरी बिशप फोर्टुनाटस हेनरी कॉमोंट तथा उनकी बहन मदर मैरी मैटिल्डा की अहम भूमिका रही। दोनों ने मिलकर मिशन सिस्टर्स ऑफ अजमेर की स्थापना की। इस संस्था का उद्देश्य महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा के साथ सामाजिक उत्थान और जरूरतमंदों की मदद करना था। बाद में इस व्यवस्था को जयपुर स्थानांतरित किया गया। 25 फरवरी 1926 को सेंट एंजेला सोफिया स्कूल की शुरुआत जयपुर में हुई। अनाथालय आज भी जरूरतमंद और वंचित कैथोलिक बच्चों की सेवा कर रहा है। स्कूल का नाम 16वीं सदी की इटली की संत एंजेला ऑफ मेरिसी के नाम पर रखा गया, जिन्होंने गरीब और अनाथ बच्चों की शिक्षा के लिए काम किया। 1928 में शुरू हुआ डे स्कूल, अब CBSE से संबद्ध शुरुआत में बोर्डिंग हाउस के रूप में चलने वाली संस्था में बाद में डे स्कूल शुरू किया गया। पहला डे-स्कॉलर 1928 में दाखिल हुआ। इसके बाद स्कूल सभी धर्मों के बच्चों के लिए खुला रहा। स्कूल का संचालन मिशन सिस्टर्स ऑफ अजमेर करती हैं, जो महिला शिक्षा और सामाजिक उत्थान के लिए काम करती हैं। स्कूल के नाम और प्रतीक चिह्न का भी खास अर्थ 'सोफिया' ग्रीक भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ 'बुद्धिमत्ता' है। स्कूल के प्रतीक चिह्न में एक स्क्रॉल, सूर्य की सुनहरी किरणें, हिंदी शब्द 'वचन' और मैरून रंग की लहरदार पट्टी शामिल है। इस पट्टी पर दो क्रॉस बने हैं। स्कूल का आदर्श वाक्य 'Give Wisdom to Little Ones' है, जिसका भाव बच्चों को ज्ञान देना है। शताब्दी समारोह के जरिए स्कूल ने अपनी ऐतिहासिक यात्रा, शिक्षा और सेवा से जुड़े उद्देश्यों तथा अलग-अलग पीढ़ियों के विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ अपने रिश्तों को फिर से याद किया।