गारंटी- वारंटी अवधि के दौरान एसी की खराबी दूर न करने और ग्राहक से सर्विस के नाम पर जबरन पैसे मांगने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग जैसलमेर ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग के अध्यक्ष पवन कुमार ओझा और सदस्य रमेश कुमार गौड़ की पीठ ने गोदरेज कंपनी की इस हरकत को सेवा में बड़ी कमी और नियमों के विपरीत माना है। आयोग ने पीड़ित ग्राहक अंकित के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को रिपेयरिंग के नाम पर वसूले गए 7 हजार रुपए लौटाने और मानसिक व आर्थिक परेशानी के एवज में 13 हजार रुपए का एकमुश्त हर्जाना देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही आयोग ने 15 दिनों के भीतर एसी की पूरी जांच कर उसकी सभी कमियों को बिल्कुल मुफ्त में ठीक करने का सख्त निर्देश जारी किया है। ​यह है पूरा मामला ​आयोग के निजी सचिव सुधांश सोनी ने बताया कि शहर के निवासी अंकित ने ऑनलाइन जियो प्लेटफॉर्म से 36,990 रुपए जमा करवाकर गोदरेज कंपनी का एक एसी बुक करवाया था। जियो द्वारा सप्लाई किया गया, यह एसी जून 2024 में ग्राहक के घर पर लगाया गया था। लेकिन महज दो-तीन महीने चलने के बाद अगस्त-सितंबर 2024 में ही एसी ने कूलिंग (ठंडक) देना बंद कर दिया। इसके बाद सर्दियों का मौसम आ जाने के कारण एसी का उपयोग नहीं हुआ। ​वारंटी में भी मांगे सर्विस के पैसे ​सर्दियां बीतने के बाद अप्रैल 2025 में जब एसी चालू किया गया, तो समस्या जस की तस थी। इस पर पीड़ित ने अप्रैल 2025 में कंपनी में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। काफी दिन बीत जाने पर भी जब कोई मिस्त्री नहीं आया, तो दोबारा संपर्क करने पर कंपनी ने बताया कि पुरानी शिकायत बिना समाधान के ही खारिज कर दी गई है। इसके बाद बार-बार फोन करने पर कंपनी की तरफ से कहा गया कि 'जब तक मिस्त्री को अलग से पैसे नहीं दोगे, तब तक कोई घर नहीं आएगा।' ​उपभोक्ता आयोग ने माना अनुचित व्यवहार ​वारंटी पीरियड में होने के बावजूद कंपनी के इस तानाशाही भरे रवैये से परेशान होकर पीड़ित ने उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की। आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए कंपनी के इस व्यवहार को अनुचित व्यापार प्रक्रिया माना। ​आयोग ने आदेश दिया है कि फैसले की तिथि से 45 दिनों के भीतर परिवादी को कुल देय राशि (20,000 रुपये) का भुगतान किया जाए। यदि कंपनी 45 दिनों में यह राशि जमा नहीं करती है, तो उसे पूरी रकम पर भुगतान की तारीख तक 9 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी चुकाना होगा।