जैसलमेर में सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक (एमडी) जगदीश सुथार और पूर्व कैशियर विवेक सैन को कोर्ट ने न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेज दिया है। फर्जी हस्ताक्षर से किसानों के क्लेम के 70 लाख रुपए हड़पने के मामले में दोनों आरोपियों को 17 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। मामले में आरोपी व्यवस्थापक नरेश कुमार को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। वर्तमान पदों पर थे दोनों आरोपी, एक अन्य की तलाश जारी गिरफ्तार पूर्व एमडी जगदीश सुथार वर्तमान में बाड़मेर में उप रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत हैं, जबकि विवेक सैन मोहनगढ़ को-ऑपरेटिव मैनेजर है। मामले में चांधन ब्रांच मैनेजर अश्विनी केवलिया फरार है, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है। फर्जी हस्ताक्षरों से 70 लाख का गबन, दो किस्तों में निकाली राशि सम थाना प्रभारी प्रह्लाद के अनुसार 2020 में कनोई ग्राम सेवा सहकारी समिति में करीब 70 लाख रुपए की हेराफेरी सामने आई। एएसपी रेवंतदान की जांच में पता चला कि अध्यक्ष रोजे खान के फर्जी हस्ताक्षरों से राशि निकाली गई। तत्कालीन एमडी जगदीश सुथार और व्यवस्थापक नरेश कुमार ने मिलीभगत कर 70 किसानों के कृषि क्लेम की राशि का दुरुपयोग किया। नरेश को 30 अगस्त 2020 को हटाने के बाद भी 8 सितंबर को 20 लाख और 25 सितंबर को 50 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया। दूसरी ब्रांच से भुगतान, चार अधिकारी दोषी जांच में सामने आया कि मुख्य खाता जैसलमेर में होने के बावजूद भुगतान चांधन ब्रांच से किया गया और किसानों के खातों में सीधे राशि ट्रांसफर नहीं की गई। को-ऑपरेटिव एक्ट की धारा 55 व 57 के तहत जांच में एमडी जगदीश सुथार, व्यवस्थापक नरेश कुमार, ब्रांच मैनेजर अश्विनी केवलिया और कैशियर विवेक सैन दोषी पाए गए। नरेश जमानत पर है, जबकि सुथार और विवेक सैन गिरफ्तार हैं और अश्विनी की तलाश जारी है। --- संबंधित ये खबर भी पढ़ें … किसानों के 70 लाख रुपए आपस में बांटे:पूर्व मैनेजर के साथ मिलकर किया घोटाला; को-ऑपरेटिव बैंक का पूर्व MD और कैशियर गिरफ्तार जैसलमेर में किसानों के क्लेम के 70 लाख रुपए हड़पने वाले सेंट्रल कॉ-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक (एमडी) और कैशियर को 17 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया। पूरी खबर पढ़िए