जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क (डीएनपी) में गोडावण को बचाने के लिए वन विभाग ने लोमड़ियों के घर (मांद) को नष्ट करने की योजना पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही गोडावणों को जंगल में छोड़ने का अभियान जारी रहेगा। डेजर्ट नेशनल पार्क के एसीएफ अशोक सिंह ने कहा - लोमड़ियों को दूसरी जगह शिफ्ट करके नेचुरल सिस्टम को डिस्टर्ब नहीं किया जाएगा। अन्य गोडावण को भी सम के खुले एरिया में छोड़ने की प्रक्रिया जारी रहेगी। दरअसल 18 अक्टूबर को कैप्टिव-ब्रेड गोडावणों में से एक युवा पक्षी मृत मिला था, जिसके करीब 100 मीटर दूर लोमड़ी की गुफा पाई गई थी। इसके बाद लोमड़ियों के ठिकाने उजाड़ने की चर्चा शुरू हुई, जिस पर वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने कड़ा विरोध करते हुए इसे प्राकृतिक संतुलन के खिलाफ बताया था। सऊदी अरब में 50% सर्वाइवल रेट से सीख वैज्ञानिक सऊदी अरब में 1986 से चल रहे हुबारा बस्टर्ड संरक्षण प्रोजेक्ट के अनुभवों को अपना रहे हैं। सऊदी अरब में शुरुआती दौर में छोड़े गए अधिकांश पक्षी शिकार हो गए थे। तब लोमड़ियों और जंगली बिल्लियों को हटाने के बावजूद नुकसान कम नहीं हुआ, क्योंकि बाज (ईगल) और उल्लू (आउल) जैसे शिकारी पक्षी भी खतरा बने हुए थे। इसके बाद जब उड़ने में सक्षम चार महीने के पक्षियों को छोड़ा गया, तो उनका सर्वाइवल रेट सुधरकर 50% तक पहुंचा और आबादी 300 से 400 तक पहुंच गई। इसी अनुभव से सीख लेते हुए भारत में प्रोजेक्ट GIB के वैज्ञानिकों ने छह महीने की उम्र के पक्षियों को जंगल में छोड़ने का फैसला किया है। 6 महीने के गोडावणों को जंगल में छोड़ने की तैयारी प्रोजेक्ट GIB के लीड साइंटिस्ट डॉ. सुतीर्थ दत्ता के अनुसार, पहले चरण में छह महीने की उम्र वाले अधिकतम 10 गोडावणों को जंगल में छोड़ा जाएगा। इनकी वास्तविक संख्या पक्षियों की शारीरिक फिटनेस और स्वास्थ्य के आधार पर तय होगी। छह महीने की उम्र तक गोडावण अपने वयस्क आकार का करीब 70 से 75 प्रतिशत हिस्सा हासिल कर लेते हैं और उड़ने में सक्षम हो जाते हैं। प्राकृतिक आवास संवारना जरूरी एक्सपर्ट्स का मानना है कि जंगली झुंड के साथ रहकर ये पक्षी प्राकृतिक माहौल में खुद को ढाल सकेंगे। जीएस भारद्वाज, डायरेक्टर, WII के अनुसार, केवल कैद में पाले गए पक्षी ही नहीं, बल्कि जंगल में जन्मे पक्षी भी शिकारियों के खतरे का सामना करते हैं। डॉ. सुमित डऊकिया, IUCN-CEM सदस्य ने बताया, केवल ब्रीडिंग कराना काफी नहीं है। कैप्टिव पक्षियों को ऐसे शिकारियों से बचने का प्रशिक्षण देना मुश्किल है जिन्हें उन्होंने कभी देखा ही नहीं। इसलिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास का विकास पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। सम और रामदेवरा के केंद्रों में हैं 97 गोडावण वर्तमान में सम और रामदेवरा स्थित प्रोजेक्ट GIB केंद्रों में कुल 97 गोडावण हैं। इनमें 40 पक्षी जंगल से अंडे लाकर तैयार किए गए हैं, जबकि 57 कृत्रिम ब्रीडिंग के जरिए पैदा हुए हैं। डॉ. सुतीर्थ दत्ता के अनुसार, आने वाले वर्षों में हर साल करीब 30 गोडावणों को जंगल में छोड़ने की योजना है। यदि शुरुआती दौर में 30 से 35 प्रतिशत पक्षी भी जीवित रहने में सफल होते हैं, तो इससे देश में बची जंगली गोडावण आबादी को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल जंगली गोडावणों की संख्या करीब 130 बताई गई है। ….. यह खबर भी पढ़ें … गोडावण को बचाने के लिए लोमड़ियों के घर तोड़ेंगे:एक्सपर्ट बोले- शिकारियों से बचने की ट्रेनिंग नहीं मिली; 100 मीटर दूर मिली थी मांद जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में गोडावण को बचाने के लिए लोमड़ियों के घर (मांद) तोड़े जाएंगे। सम एरिया को छोड़कर दूसरी जगह जाने के लिए मजबूर किया जाएगा। डेजर्ट फॉक्स ने 18 अक्टूबर को कुंड में पानी पीते समय गोडावण का शिकार कर लिया था। पूरी खबर पढ़ें -- ब्रीडिंग-सेंटर से जंगल में छोड़े गोडावण का 4-दिन बाद शिकार:पानी पीते समय लोमड़ी ने किया हमला, सैटेलाइट ट्रैकिंग से पता चला; 7 को छोड़ना टला जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) में छोड़े गए 6 महीने के गोडावण का मरू लोमड़ी ने शिकार कर लिया। सम (जैसलमेर) के ब्रीडिंग सेंटर में पाले गए इस नर गोडावण को 14 अक्टूबर को छोड़ा गया था। पूरी खबर पढ़िए