जैसलमेर के जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (डाईट) के प्रिंसिपल और पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर पर राजस्थान राज्य सूचना आयोग ने एक्शन लिया है। दरअसल, उन्होंने आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना नहीं दी थी और सुनवाई में लगातार अनुपस्थित रहे थे। प्रिंसिपल और लोक सूचना अधिकारी पर 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। राज्य सूचना आयुक्त टीकाराम शर्मा ने यह आदेश परिवादी सत्यनारायण छंगाणी की शिकायत पर दिया। मई 2025 में लगाई थी आरटीआई जैसलमेर के गोयदानी पाड़ा निवासी सत्यनारायण छंगाणी ने 8 मई 2025 को आरटीआई आवेदन देकर जानकारी मांगी थी। तय समय में सूचना नहीं मिलने पर उन्होंने पहली अपील की, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला राजस्थान राज्य सूचना आयोग पहुंचा। आयोग ने 28 अक्टूबर 2025 को आदेश जारी कर 30 दिन के अंदर कार्यालय में मौजूद रिकॉर्ड के हिसाब से मांगी गई सभी सूचनाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। 5 हजार पेज का रिकॉर्ड होने का दिया था तर्क आयोग के आदेश के बावजूद सूचना नहीं मिलने पर परिवादी ने दोबारा शिकायत की। संबंधित अधिकारी की ओर से बताया गया कि मांगी गई जानकारी 5 हजार से ज्यादा पेजों में है, इसलिए उसे उपलब्ध कराना लंबी प्रक्रिया है। आवेदक को रिकॉर्ड का निरीक्षण करने के लिए भी कहा गया था। इसके बाद आयोग ने 16 जून, 27 अगस्त और 6 अक्टूबर 2026 को सुनवाई की तारीख तय की, लेकिन संबंधित अधिकारी किसी भी सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए। उन्होंने अपना जवाब भी प्रस्तुत नहीं किया। आयोग ने इसे आदेशों की अवहेलना और कर्तव्य के प्रति लापरवाही मानते हुए जुर्माना लगाया। 21 दिन में जमा करानी होगी राशि सूचना आयुक्त टीकाराम शर्मा ने आरटीआई एक्ट-2005 की धारा 20 के तहत 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। आदेश के अनुसार, जुर्माने की राशि आदेश की प्रति मिलने के 21 दिन के भीतर डिमांड ड्राफ्ट के जरिए सचिव, राजस्थान राज्य सूचना आयोग, जवाहर लाल नेहरू मार्ग, जयपुर-302017 के नाम जमा करानी होगी।