जैसलमेर जिले में इस साल सूखे और अभाव की गंभीर परिस्थितियों से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। आपदा प्रबंधन सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के निर्देशों की अनुपालना में जिलेभर में कुल 61 नए चारा डिपो खोले जाने की प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी गई है। इस फैसले से ग्रामीण इलाकों और दूर-दराज की ढाणियों में पशुपालन से जुड़े किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि लगातार कम बारिश और सूखे के कारण चारे का संकट गहराता जा रहा था। प्रशासन के इस कदम से अब जरूरतमंद पशुपालकों को तय नियमों के तहत रियायती दरों पर चारा उपलब्ध हो सकेगा। ​कलेक्टर बोलीं- जैसे-जैसे डिमांड आएगी, वैसे-वैसे जारी होंगी स्वीकृतियां इस संबंध में जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने स्पष्ट किया है कि "जैसे-जैसे चारा डिपो की डिमांड आ रही है, वैसे-वैसे स्वीकृतियां जारी की जा रही हैं, भविष्य में और भी स्वीकृतियां जारी की जाएंगी।" प्रशासन की यह प्राथमिकता है कि जिले के किसी भी अभावग्रस्त क्षेत्र का कोई भी पशुपालक चारे के अभाव में परेशान न हो। ​सिर्फ लघु और सीमान्त किसानों को मिलेगा लाभ जारी आदेश के मुताबिक, इन सभी डिपो पर मिलने वाला यह विशेष अनुदान केवल लघु एवं सीमान्त कृषकों को ही दिया जाएगा। प्रत्येक पशुपालक को उसके पास मौजूद पशुओं की संख्या के प्रमाणित अनुपात के आधार पर ही चारा वितरित किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चारे की खरीद गैर-अभावग्रस्त जिलों या पड़ोसी राज्यों से की जाएगी, और इसका वितरण पूरी तरह से 'बिना लाभ-हानि' (नो-प्रॉफिट, नो-लॉस) के आधार पर किया जाएगा। ​पारदर्शिता के लिए कमेटी गठित चारे की कीमतों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिला कलेक्टर द्वारा पटवारी, सरपंच और राजस्व निरीक्षक की एक स्थानीय समिति का गठन किया गया है। यह कमेटी चारे के क्रय मूल्य, परिवहन लागत और 10 रुपये प्रति क्विंटल हैंडलिंग चार्ज को जोड़कर अंतिम विक्रय मूल्य तय करेगी। इसके अलावा, 50 किलोमीटर से अधिक की दूरी से लाए जाने वाले चारे पर ही परिवहन अनुदान देय होगा। प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में नियमों की सख्त पालना सुनिश्चित की जाए ताकि राहत कार्यों में पूरी पारदर्शिता बनी रहे। जैसलमेर जिले में अकाल और अभाव की परिस्थितियों से निपटने के लिए जिला प्रशासन द्वारा स्वीकृत किए गए 61 चारा डिपो की सूची