सीमावर्ती जैसलमेर जिले में मानसून का मौसम लगातार बदल रहा है। प्रदेश के दूसरे हिस्सों में अच्छी बारिश हो रही है, लेकिन जैसलमेर और पोकरण के सुदूर पश्चिमी इलाकों में मानसूनी हवाओं की रफ्तार धीमी पड़ गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मौजूदा मौसम सिस्टम के चलते अगले 10 दिनों तक जिले में भारी या मध्यम बारिश की संभावना नहीं है। इस बीच तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है और लोगों को भीषण गर्मी व उमस का सामना करना पड़ रहा है। 10 दिन तक अच्छी बारिश की संभावना नहीं मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मौजूदा मौसमी तंत्र के कारण अगले 10 दिनों तक जिले में भारी या मध्यम मानसूनी बारिश की संभावना नहीं दिख रही है। आसमान में बादलों की आवाजाही बनी हुई है, लेकिन बारिश नहीं होने से उमस लगातार बढ़ रही है। 41.3 डिग्री तापमान, उमस से लोग परेशान रेगिस्तानी जिले में इन दिनों सूरज के तेवर तेज बने हुए हैं। शुक्रवार को जिले का अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह से हल्के बादल दिखाई दिए, लेकिन बारिश नहीं हुई। हवा में नमी ज्यादा होने से उमस बढ़ गई और लोग पसीने से परेशान रहे। दोपहर के समय तेज धूप के कारण बाजारों और सड़कों पर आवाजाही भी कम रही। किसानों की बढ़ी चिंता मानसून की शुरुआती दस्तक के बाद किसानों ने खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी शुरू कर दी थी। ग्रामीण इलाकों में खेत भी तैयार कर लिए गए थे, लेकिन अब अगले 10 दिनों तक बारिश नहीं होने के पूर्वानुमान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो पारंपरिक फसलों की समय पर बुवाई प्रभावित हो सकती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों ने बताई वजह मौसम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार राजस्थान के पूर्वी और मध्य जिलों में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और वहां अच्छी बारिश हो रही है। इसके विपरीत जैसलमेर और सुदूर पश्चिमी सीमावर्ती इलाकों में मानसूनी हवाओं को आगे बढ़ने के लिए जरूरी अनुकूल परिस्थितियां और पर्याप्त वायुदाब नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर हवा के दबाव में बदलाव के कारण कुछ जगहों पर घने बादल छा सकते हैं। कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी या तेज हवाएं भी चल सकती हैं, लेकिन इससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से कोई वास्तविक या स्थाई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।