जैसलमेर के ग्रामीण इलाकों में तेज अंधड़ के बाद सड़कों पर जमा हुई रेत से कई गांवों का संपर्क टूट गया है। म्याजलार-पोछीना और छापण-नाचना मार्ग पर आवागमन ठप होने से मरीजों, राहगीरों और वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण चंदा जुटाकर खुद रास्तों की सफाई कराने को मजबूर हैं और प्रशासन से जल्द राहत की मांग कर रहे हैं। महीनेभर से बंद पड़े हैं अहम मार्ग तेज हवाओं और अंधड़ के कारण ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर भारी मात्रा में मिट्टी और रेत जमा हो गई है, जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है। भारतमाला परियोजना के तहत म्याजलार से पोछीना के बीच बन रही सड़क का करीब दो किलोमीटर हिस्सा पिछले एक महीने से बंद पड़ा है। वहीं, छापण-नाचना मार्ग पर भी रेत के टीले बनने से यातायात ठप हो गया है। इससे वाहन चालक, आम लोग और बस संचालक परेशान हैं। वैकल्पिक रास्ता नहीं होने से ग्रामीण प्रशासन से सड़कों की तत्काल सफाई की मांग कर रहे हैं। मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए 90 किमी का चक्कर बंद रास्तों का सबसे ज्यादा असर मरीजों पर पड़ रहा है। शनिवार को करड़ा निवासी मगसिंह अपनी बीमार मां को म्याजलार अस्पताल ले जा रहे थे। मठ ख्याला के पास उनकी गाड़ी रेत में धंस गई। करीब एक घंटे की कोशिश के बाद भी वाहन नहीं निकल सका और मरीज की हालत बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्हें वापस लौटकर करीब 90 किलोमीटर का लंबा वैकल्पिक रास्ता तय कर अस्पताल पहुंचना पड़ा। ग्रामीण खुद करा रहे सफाई, फिर भी बनी हुई है परेशानी ग्रामीण लालूसिंह सोढा ने बताया कि सरकारी स्तर पर राहत नहीं मिलने पर स्थानीय लोगों और निजी बस संचालकों ने चंदा जुटाकर अपने स्तर पर मिट्टी हटवाने की कोशिश की, लेकिन तेज हवाओं से सड़क पर फिर से रेत जमा हो जाती है। नाचना क्षेत्र के छायण गांव के लोगों को बिजली विभाग, पंचायत समिति और उपनिवेशन विभाग के काम से रोज नाचना जाना पड़ता है, लेकिन मार्ग बंद होने से उन्हें लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। दुपहिया वाहन चालक भी रेत में फिसलकर हादसों का शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों ने निर्माण कंपनी और जिला प्रशासन से मार्ग को जल्द चालू कराने की मांग की है।