जालोर में भू-माफियाओं द्वारा मंदिर की भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। नगर पालिका सायला क्षेत्र के शांतिपुरा स्थित ऐतिहासिक एवं आस्था के केंद्र राणी भटियाणी माताजी मंदिर परिसर तथा उससे संबद्ध देवस्थान विभाग की सार्वजनिक भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पट्टा जारी किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले को लेकर सायला नगर पालिका क्षेत्र के ग्रामीणों, पूर्व सरपंचों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच कराने तथा उक्त सार्वजनिक भूमि को सरकारी संरक्षण में लेने की मांग की है। मंदिर आस्था और धार्मिक विरासत का प्रतीक पूर्व सरपंच एवं भाजपा जिला प्रवक्ता सुरेश राजपुरोहित ने बताया कि इस संबंध में जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि शांतिपुरा स्थित राणी भटियाणी माताजी मंदिर एवं उसका परिसर प्रारंभ से ही सार्वजनिक रहा है। यहां श्रद्धालु नियमित रूप से पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं। यह भूमि क्षेत्र की गहरी आस्था एवं धार्मिक विरासत का प्रतीक मानी जाती है। सुरेश राजपुरोहित ने आरोप लगाया कि वर्तमान में दूसरा पक्ष कथित रूप से संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर इस सार्वजनिक भूमि का नगर पालिका सायला से पट्टा बनवाने का प्रयास कर रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि यह पूरी प्रक्रिया निजी स्वार्थ की पूर्ति के उद्देश्य से की जा रही है। सुरेश राजपुरोहित ने बताया- सबसे पहले साल 1957-58 में इस जमीन को लेकर दुर्गादास संत बनाम हस्तीमल जैन का मामला ग्राम पंचायत में चला था। उस पर खुद हस्तीमल ने अपने बयानों में इस भूमि को सार्वजनिक माना था। आरोप है कि साल 1967 में तत्कालीन सरपंच घेवरचंद भण्डारी के कार्यकाल में एक फर्जी रजिस्ट्री तैयार करवाई गई थी। जिसके खिलाफ सायला थाने में मामला भी दर्ज है। वर्तमान में कोर्ट-स्टे लगा हुआ है हस्तीमल नामक व्यक्ति ने भंवरसिंह और अन्य लोगों के खिलाफ साल 1997 में मुकदमा दायर किया था, जो केस संख्या 2 था। यह जालौर की अदालत में विचाराधीन था। साल 2004 में कोर्ट ने हस्तीमल जैन के दावों को खारिज करते हुए उनकी रजिस्ट्री को अमान्य ठहरा दिया था। इस फैसले के खिलाफ राजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर) में एक अपील (संख्या 324/2005) दायर की गई थी। जिसमें वर्तमान में कोर्ट द्वारा स्टे ऑर्डर जारी है। अदालत के आदेश के बाद भी स्थानीय प्रशासन को गुमराह करके पट्टा बनाने की कोशिश की जा रही है। विशेष प्रस्ताव पारित कर सार्वजनिक भूमि घोषित सुरेश राजपुरोहित ने बताया कि शिकायत पत्र में लिखा है कि साल 24 दिसंबर 2018 में दोबारा इस पर कब्जा करने की कोशिश की थी। तब ग्रामीणों ने एक ग्राम सभा आयोजित कर विशेष प्रस्ताव पारित करवाकर इसे सार्वजनिक भूमि घोषित किया था। जो आज भी रिकॉर्ड में दर्ज है। इस दौरान पूर्व सरपंच एवं भाजपा जिला प्रवक्ता सुरेश राजपुरोहित, भवरलाल राजपुरोहित पूर्व उप प्रधान सायला, बगदाराम राजपुरोहित अध्यक्ष राधा कृष्ण गौशाला सायला, मंगल सिंह दहिया सायला, हिमताराम चौधरी, शम्भू सिंह दहिया वार्डपंच,अशोक राजपुरोहित वार्डपंच हेमाराम देवासी व मदन राजपुरोहित रहे।