श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल में शारदीय नवरात्र महोत्सव से शरद पूर्णिमा तक श्रद्धा और भक्ति का सैलाब उमड़ा। 11 से 26 अक्टूबर तक 16 दिनों में कुल 3 लाख 42 हजार 277 श्रद्धालुओं ने मां जसोल सहित मंदिर में विराजित आराध्य देवी-देवताओं के दर्शन किए। पिछले साल इसी अवधि के 16 दिनों में 2 लाख 79 हजार 105 श्रद्धालु पहुंचे थे। इस बार 63 हजार 172 श्रद्धालु अधिक आए, जो पिछले साल की तुलना में 22.63 प्रतिशत की वृद्धि है। महोत्सव के दौरान मां जसोल, बायोसा, सवाईसिंह, लाल बन्ना सा, खेतलाजी और काला-गौरा भैरूजी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। प्रतिदिन औसतन 21 हजार 392 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। सप्तमी, द्वादशी, त्रयोदशी और चतुर्दशी को विशेष भीड़ रही। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन, विजयादशमी पर शस्त्र पूजन शारदीय नवरात्र महोत्सव के दौरान श्री दूधेश्वर पीठाधीश्वर, गाजियाबाद, पूज्य श्रीमहंत श्री श्री 1008 नारायणगिरी जी महाराज और श्री नर्बदेश्वर महादेव मंदिर, जसोल के महंत श्री श्री 1008 गणेशपुरी जी महाराज के सान्निध्य में विशेष धार्मिक अनुष्ठान हुए। संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल और संस्थान प्रवक्ता कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने श्रद्धालुओं की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, राष्ट्र की उन्नति और विश्वकल्याण की कामना के साथ यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं। दूधेश्वर वेद विद्यापीठ, गाजियाबाद से आए विद्वान आचार्यों और पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन कराया। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन किया गया और यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का समापन हुआ। 16 दिन तक रात्रि जागरण, कन्या पूजन और छप्पन भोग मंदिर परिसर में लगातार 16 दिनों तक रात्रि जागरण हुए। स्थानीय भजनियों और हड़वा (बाड़मेर) से आए मांगणियार कलाकारों ने मां जसोल सहित आराध्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान किया। भजनों और जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा। प्रतिपदा से नवमी तक तथा आश्विन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी पर सर्व समाज की कन्याओं का पूजन किया गया। कन्याओं को तिलक लगाकर पुष्प, फल-प्रसाद, अन्नपूर्णा प्रसाद और दक्षिणा अर्पित की गई। श्रद्धालु परिवारों ने अपनी मनोकामनाओं और संकल्पों के साथ मां जसोल के चरणों में छप्पन भोग और भोजन-प्रसादी भी अर्पित की। त्रयोदशी पर निःशुल्क भोजनशाला, श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम त्रयोदशी पर श्रद्धालुओं की अधिक आवक को देखते हुए मंदिर संस्थान की ओर से रिवर फ्रंट पार्किंग परिसर में निःशुल्क भोजनशाला संचालित की गई। यहां भोजन-प्रसादी के साथ शुद्ध पेयजल, बैठने और स्वच्छता की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने के लिए जिगजैग कतार प्रणाली, प्रसाद टोकन व्यवस्था, छायादार टेंट, मिस्टिंग सिस्टम, विश्राम स्थल और फुटओवर ब्रिज की सुविधा उपलब्ध कराई गई। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी गई। जूते-चप्पलों के लिए क्रमांकित स्टैंड तथा वृद्धजन और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर और गोल्फ कार्ट की व्यवस्था भी की गई। पार्किंग और आवागमन को व्यवस्थित रखने के लिए संस्थान के कार्मिकों ने व्यवस्थाएं संभालीं। 13 लाख खेजड़ी पौधे लगाने का आह्वान धार्मिक आयोजनों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी पर एक वर्ष में 13 लाख खेजड़ी वृक्ष लगाने का आह्वान किया था। इसी अभियान के तहत मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को मां जसोल के स्वरूप खेजड़ी के पौधे प्रसाद के रूप में वितरित किए जा रहे हैं। संस्थान ने श्रद्धालुओं से पौधे लगाने के बाद 12 वर्षों तक उनकी देखभाल और संरक्षण करने की अपील की है। साथ ही प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष सप्तमी को मां जसोल के जन्मोत्सव पर रोपित खेजड़ी वृक्ष के साथ सेल्फी लेकर संस्थान के सोशल मीडिया हैंडल को टैग करने का आग्रह किया गया है, ताकि अभियान में जनभागीदारी बढ़े। आस्था, सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संगम संस्थान के अनुसार, 16 दिवसीय आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों, रात्रि जागरण, कन्या पूजन, छप्पन भोग, भोजन-प्रसादी और श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं ने जसोल धाम की धार्मिक और सेवाभावी परंपराओं को आगे बढ़ाया। पिछले साल की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या में हुई 22.63 प्रतिशत की वृद्धि मां जसोल के प्रति लोगों की आस्था और धाम में बढ़ती श्रद्धालु आवक को दर्शाती है।