मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (सुविवि) में निर्माण कार्यों और भुगतानों के नाम पर चल रहे वित्तीय भ्रष्टाचार की परतें खुल रही हैं। ताजा मामले में फार्मेसी विभाग और आर्ट्स कॉलेज के बीच स्थित नाले की मरम्मत के नाम पर 24 लाख रुपए बहा दिए गए, जबकि धरातल पर महज चंद लाख रुपए की मामूली लीपापोती दिख रही है। दूसरी ओर, विधि महाविद्यालय के निर्माण में यूपीवीसी दरवाजे और खिड़कियां लगाए बिना ही 14.22 लाख रुपए के बिल के भुगतान का मामला सामने आया है। इस गंभीर फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद विवि प्रशासन ने संविदा कनिष्ठ अभियंता (सिविल) रवींद्रपाल सिंह चौहान को 14 सितंबर 2026 को बर्खास्त कर दिया। हालांकि, विधि महाविद्यालय प्रशासन का दावा है कि दरवाजे-खिड़कियां खरीद ली गई हैं और उन्हें लगाने का काम जारी है। वहीं, नाले की मरम्मत पर 24 लाख के भारी-भरकम भुगतान पर प्रशासनिक अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। पूरे मामले की जांच के लिए विवि ने लॉ कॉलेज डीन प्रो. आनंद पालीवाल की संस्तुति पर 3 अक्टूबर 2026 को 3 सदस्यीय समिति गठित की है, जो फाइलों की पड़ताल कर रही है। 6 माह से अधूरे फार्मेसी ब्लॉक का जबरन हैंडओवर लेने का दबाव फार्मेसी विभागाध्यक्ष द्वारा 23 अप्रैल 2026 को कुलगुरु को भेजे गोपनीय पत्र ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी। पत्र के अनुसार नया फार्मेसी ब्लॉक पिछले 6 महीने से अधिक समय से अधूरा पड़ा है, लेकिन भू-संपत्ति कार्यालय इसे जबरन हैंडओवर लेने के लिए दबाव बना रहा है। भवन में इलेक्ट्रिक वायरिंग आधी-अधूरी है, टॉयलेट में लाइट फिटिंग नहीं है, लैब्स में प्लेटफॉर्म के नीचे प्लास्टर गायब है और पानी की टंकी में इनलेट कनेक्शन तक नहीं है। यूरिनल्स में पाइप न होने, सीढ़ियों पर रेलिंग गायब रहने, स्टाफ रूम बिना पंखों के होने और परिसर में ड्रेनेज ध्वस्त होने से जलभराव की गंभीर स्थिति बनी हुई है। ठेकेदार द्वारा तोड़ा गया साइकिल स्टैंड भी ठीक नहीं किया गया। नाले की मरम्मत के नाम पर 24 लाख रुपए ठिकाने लगाने के इस पूरे मामले में विभागाध्यक्ष ने उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। 14.22 लाख रु. का फर्जी बिल, निरीक्षण में नहीं मिला सामान कुलगुरु को भेजी शिकायत के अनुसार, विधि महाविद्यालय के एलएलएम पीजी भवन के प्रथम तल निर्माण में माप पुस्तिका और बिल में 22 जनवरी 2026 से 20 अप्रैल 2026 के बीच यूपीवीसी डोर, विंडो, स्लाइडिंग विंडो व फ्लश डोर की फर्जी प्रविष्टियां दर्ज कर 14,22,049 रुपए का बिल तैयार किया गया। 23 अगस्त 2026 को भौतिक निरीक्षण में मौके पर एक भी सामग्री स्थापित या उपलब्ध नहीं मिली। कार्रवाई और जांच जारी मामला सामने आने पर भू-संपत्ति कार्यालय ने 24 अगस्त को कनिष्ठ अभियंता (सिविल) रवींद्रपाल सिंह चौहान को नोटिस दिया गया था। फिर 14 सितंबर, 2026 को उनकी संविदा सेवाएं समाप्त कर दी गईं। फिलहाल लॉ कॉलेज डीन की संस्तुति पर बनी 3 सदस्यीय कमेटी (डॉ. राजश्री चौधरी, जितेंद्र भटनागर, डॉ. कल्पेश निकावत) भुगतानों और घोटालों से जुड़ी फाइलों की जांच कर रही है। कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा के अगले कदम और कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।