झालावाड़ में सूर्यवंशी कुमरावत (तम्बोली) समाज और महिला मंडल की ओर से शरद पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से मनाया गया। गांवड़ी के तालाब स्थित नानादेवी मंदिर और तम्बोली मोहल्ले के रामजानकी मंदिर में धार्मिक आयोजन हुए। नानादेवी मंदिर में महिलाओं ने भजन-कीर्तन कर मां को 56 से अधिक प्रकार के व्यंजनों का छप्पन भोग लगाया। वहीं, शरद पूर्णिमा की रात लोकदेवता केसू बाउजी का पारंपरिक विवाह संपन्न हुआ। इसके बाद शोभायात्रा निकाली गई और तड़के चार बजे केसू बाउजी के प्रतीक का विसर्जन किया गया। भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर गांवड़ी के तालाब स्थित नानादेवी मंदिर में महिलाओं ने मां नानादेवी, राधा-कृष्ण, भोलेनाथ, खाटूश्याम बाबा और हनुमानजी के भजन गाए। ढोलक की थाप पर महिलाओं ने भक्तिमय नृत्य किया। भजन-कीर्तन से मंदिर परिसर का माहौल भक्तिमय बना रहा। 56 से अधिक व्यंजनों का लगाया छप्पन भोग शरद पूर्णिमा के अवसर पर महिलाओं ने 56 से अधिक प्रकार के व्यंजन तैयार कर मां नानादेवी को छप्पन भोग अर्पित किया। इसके बाद देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना और महाआरती की गई। श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया और सामूहिक भोज का आयोजन भी हुआ। समाज के सदस्यों ने उत्साह के साथ धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया। लोकदेवता केसू बाउजी का पारंपरिक विवाह शरद पूर्णिमा की रात लोकदेवता केसू बाउजी का पारंपरिक विवाह कराया गया। विवाह में केसू बाउजी के प्रतीक के रूप में मालतुलसी (मरवा) और उनकी पत्नी गडू बाई के प्रतीक के रूप में छोटी मटकी में दीपक रखा गया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह की रस्में संपन्न हुईं। रात में निकली शोभायात्रा, तड़के हुआ विसर्जन विवाह के बाद तम्बोली मोहल्ले से तेजाजी महाराज के आगे पीपानंद मार्ग स्थित उनके थानक तक शोभायात्रा निकाली गई। धार्मिक परंपराओं के अनुसार तड़के चार बजे केसू बाउजी के प्रतीक का विसर्जन किया गया। आयोजन में समाज के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी धार्मिक आस्था व पारंपरिक रीति-रिवाजों के प्रति जुड़ाव व्यक्त किया।