झालावाड़ जिले के रायपुर तहसील क्षेत्र के गांवों में किसान इन दिनों प्याज की फसल तैयार करने में जुटे हैं। अनुकूल मौसम और किसानों की कड़ी मेहनत के कारण इस बार फसल अच्छी गुणवत्ता के साथ तैयार हो रही है, जिससे किसानों में उत्साह है। स्थानीय किसानों के अनुसार, प्याज की खेती में लगभग 5 से 6 महीने का समय लगता है। नवंबर माह में नर्सरी तैयार की जाती है और जनवरी के पहले सप्ताह में रोपाई की जाती है। इसके बाद नियमित देखभाल और लगभग 6 बार सिंचाई के बाद फसल कटाई के लिए तैयार होती है। एक बीघा में 60-70 क्विंटल उत्पादन की उम्मीद किसानों को इस बार एक बीघा जमीन में लगभग 60 से 70 क्विंटल तक प्याज का उत्पादन मिलने की उम्मीद है। यह पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर माना जा रहा है। अच्छी पैदावार से किसानों को मुनाफे की आशा है, लेकिन बाजार भाव को लेकर उनकी चिंता अब भी बनी हुई है। खेजरपुर निवासी धापू बाई दांगी ने बताया कि हर साल कड़ी मेहनत के बावजूद उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाते, जिससे निराशा होती है। उन्होंने कहा कि इस बार फसल अच्छी है और मौसम ने भी साथ दिया है, इसलिए किसानों को अच्छे भाव मिलने की उम्मीद है। उचित मूल्य निर्धारित करने की मांग किसानों का कहना है कि वे दिन-रात मेहनत करके फसल तैयार करते हैं, लेकिन कभी रोग, कभी प्राकृतिक आपदा और कभी बाजार में कम दाम मिलने के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। यदि समय पर अच्छे भाव मिल जाएं तो किसान तुरंत फसल बेचने को तैयार रहते हैं, अन्यथा उन्हें भंडारण कर बेहतर कीमत का इंतजार करना पड़ता है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि प्याज के लिए एक स्थिर बाजार व्यवस्था और उचित मूल्य निर्धारित किया जाए, ताकि उनकी मेहनत का सही लाभ उन्हें मिल सके।