झालावाड़ में आदिवासी समाज ने संसद में की गई एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर आक्रोश व्यक्त किया है। इस संबंध में भारत आदिवासी पार्टी के जिलाध्यक्ष राजकुमार कटारा के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ को एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बताया गया कि यह टिप्पणी 30 मार्च को संसद में वामपंथी उग्रवाद पर चर्चा के दौरान की गई थी। गृह मंत्री ने बांसवाड़ा-डूंगरपुर क्षेत्र के सांसद राजकुमार रोत के संबंध में कथित तौर पर कहा था, "आप चुनाव लड़कर यहां बैठे हैं, नहीं तो आप भी सरेंडर की सूची में होते।" आदिवासी समाज ने इस बयान को उन्हें नक्सलवाद से जोड़ने का प्रयास बताया है। समाज का कहना है कि यह बयान न केवल एक जनप्रतिनिधि की गरिमा के विरुद्ध है, बल्कि पूरे आदिवासी समुदाय की छवि को भी ठेस पहुंचाता है। इससे समाज में व्यापक आक्रोश और असंतोष फैल गया है। आदिवासियों को दबाने की कोशिश का आरोप ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि सांसद राजकुमार रोत ने संसद में आदिवासी समुदाय के अधिकारों और समस्याओं को उठाते हुए कहा था कि नक्सलवाद से सबसे अधिक प्रभावित आदिवासी ही हैं, लेकिन उनकी आवाज को पर्याप्त समय नहीं दिया जाता। समाज ने आरोप लगाया कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष कर रहे आदिवासियों को अक्सर नक्सलवाद का ठप्पा लगाकर दबाने की कोशिश की जाती है। ज्ञापन में संविधान की पांचवीं एवं छठी अनुसूची, पेसा कानून और फॉरेस्ट राइट्स एक्ट को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग भी उठाई गई। बयान पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से गृह मंत्री द्वारा दिए गए बयान पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग की गई है। इसके साथ ही, संसद की कार्यवाही से इस टिप्पणी को हटाने और भविष्य में ऐसी टिप्पणियों को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की भी अपील की गई है। आदिवासी समाज ने जोर देकर कहा कि वे सदैव संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखते हैं, लेकिन इस प्रकार के बयान सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करते हैं। इसलिए, इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई है।