कालन्द्री में त्रिदिवसीय वाचना शिविर का शुभारंभ उज्ज्वला फार्म हाउस में हुआ। शिविर के शुभारंभ अवसर पर फार्म हाउस के संचालक श्रेष्ठीवर्य रमेश कुमार प्रेमचंद शाह परिवार ने साधु-साध्वी भगवंतों का मंगल कलश एवं अक्षत से स्वागत किया। इसके बाद परिसर में स्थित बांस से निर्मित जैन मंदिर में भगवान आदिनाथ के दर्शन-पूजन किए गए तथा वाचना का विधिवत शुभारंभ हुआ। वाचना के दौरान "प्रभु का श्रामण एवं जीवन का चैतन्य स्पर्श" विषय पर प्रवचन देते हुए कहा गया कि व्यक्ति को जीवन में क्रोध और नाराजगी से दूर रहना चाहिए। मानव जीवन में जो कुछ भी प्राप्त होता है, वह प्रभु की कृपा और अपने पुण्यों का फल है। इसलिए संतोषपूर्वक जीवन जीना ही श्रेष्ठ मार्ग है। प्रवचन में बताया गया कि व्यक्ति को अपने अहंकार और "मैं" की भावना से ऊपर उठना चाहिए, क्योंकि यही भाव क्रोध, मोह, माया और अभिमान का कारण बनता है। मनुष्य को अपने व्यवहार, विचार, कार्य और निष्ठा के माध्यम से लोककल्याण करते हुए अधिक से अधिक पुण्य अर्जित करने का प्रयास करना चाहिए। ज्ञान, दर्शन और चारित्र की आराधना से व्यक्ति स्वयं पर विजय प्राप्त कर अपने जीवन के अवगुणों और दुखों को कम कर सकता है। सांसारिक और संयम जीवन का अंतर स्पष्ट करते हुए कहा गया कि सांसारिक जीवन दुखों का कारण बनता है, जबकि संयम का मार्ग दुखों से मुक्ति की दिशा में ले जाता है। इस अवसर पर जैन फाउंडेशन के संस्थापक श्रेष्ठीवर्य रमेश कुमार पी. शाह ने साधु-साध्वी भगवंतों के संयम, तप, स्वाध्याय एवं जैन धर्म के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि अल्प आयु में संयम जीवन अपनाकर समाज को प्रेरणा देने का कार्य अनुकरणीय है। कार्यक्रम में कालन्द्री जैन संघ के अध्यक्ष भरत संघवी, सिरोही के रमेश कोठारी, महावीर जैन, कोल्हापुर के वरुण जैन, श्रीमती उज्ज्वला शाह सहित दक्षिण भारत से आए अनेक प्रवासी श्रद्धालु और कालन्द्री क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। प्रकृति की गोद में स्थित यह कृषि फार्म पूर्व में भी अनेक साधु-साध्वी भगवंतों की निश्रा, स्वाध्याय, तप एवं आराधना का केंद्र रहा है। परिसर में मंदिर, उपाश्रय एवं कॉटेज की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह फार्म हाउस पाड़ीव-कालन्द्री मार्ग पर स्थित है।