पंचायतीराज चुनाव को लेकर करौली जिले में सियासी हलचल तेज हो गई है। जिला प्रमुख की कुर्सी पर कब्जे को लेकर कांग्रेस और भाजपा अपनी-अपनी रणनीति बना रहे है। वर्ष 1999 से अब तक जिला प्रमुख पद पर कांग्रेस का कब्जा रहा है। ऐसे में भाजपा के सामने इस बार कांग्रेस का पुराना सियासी वर्चस्व तोड़ने की चुनौती है। सवाल यही है कि क्या भाजपा पहली बार जिला प्रमुख की कुर्सी तक पहुंच पाएगी या कांग्रेस अपना दबदबा बरकरार रखेगी? कांग्रेस जिलाध्यक्ष और टोडाभीम विधायक घनश्याम महर ने जिला प्रमुख की सीट पर कांग्रेस की जीत का दावा किया है। वहीं, भाजपा जिलाध्यक्ष गोवर्धन सिंह को नगर निकाय चुनाव जैसा प्रदर्शन पंचायत चुनाव में भी दोहराने की उम्मीद है। भाजपा जिला परिषद में अपना बोर्ड बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। निकाय चुनाव परिणाम ने पंचायत चुनाव को दिलचस्प बनाया हालिया निकाय चुनाव में करौली और मंडरायल में कांग्रेस, जबकि सपोटरा, सूरौठ और हिंडौन में भाजपा ने बोर्ड बनाया। टोडाभीम में निर्दलीय प्रत्याशी अध्यक्ष बनीं। इन नतीजों ने पंचायत चुनाव के मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। पूर्व मंत्री रमेश मीणा, विधायक घनश्याम महर, दर्शन सिंह गुर्जर और हंसराज मीणा की रणनीति भी अहम मानी जा रही है। अब उम्मीदवारों के चयन और चुनावी समीकरणों पर सबकी निगाहें हैं। कांग्रेस के सामने अपना गढ़ बचाने, जबकि भाजपा के सामने इतिहास रचने की चुनौती है।