करौली में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जिला मानसिक स्वास्थ्य इकाई और मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। नर्सिंग महाविद्यालय में संगोष्ठी और मनोचिकित्सा विभाग में परिचर्चा के दौरान आत्महत्या के शुरुआती चेतावनी संकेतों की पहचान, संकटग्रस्त व्यक्ति को भावनात्मक सहयोग देने और समय पर विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों को आत्महत्या रोकथाम की सामूहिक शपथ भी दिलाई गई। संकट में व्यक्ति को अकेला न छोड़ें नर्सिंग विद्यार्थियों को बताया गया कि मानसिक तनाव या भावनात्मक संकट से गुजर रहे व्यक्ति की स्थिति को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को अकेला छोड़ने के बजाय उसकी बात संवेदनशीलता से सुननी चाहिए। जरूरत महसूस होने पर उसे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद दिलाना भी जरूरी है। मरीजों और परिजनों को बताए संकट के संकेत मनोचिकित्सा विभाग में हुई परिचर्चा में अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को मानसिक तनाव और भावनात्मक संकट के लक्षणों की जानकारी दी गई। प्रभारी मनोचिकित्सक डॉ. प्रेमराज मीना ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बात करना कमजोरी नहीं है, बल्कि मदद पाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने संकट की स्थिति में विशेषज्ञ सहायता के लिए सरकार की टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 के बारे में भी जानकारी दी। ये संकेत दिखें तो रहें सतर्क मनोचिकित्सकों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति लगातार बहुत ज्यादा निराशा दिखाए, खुद को दूसरों पर बोझ बताए, अचानक लोगों से दूरी बनाने लगे या सोशल मीडिया पर विदाई जैसे संदेश पोस्ट करे, तो इन्हें गंभीर चेतावनी संकेत माना जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में उसकी बात बिना किसी भेदभाव के ध्यान से सुनना, उसे अकेला न छोड़ना और तत्काल मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 से संपर्क करना चाहिए। सामूहिक जिम्मेदारी है आत्महत्या की रोकथाम सीएमएचओ डॉ. सतीश मीना ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम सिर्फ एक दिन का अभियान नहीं है, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील बातचीत, समय पर पहचान, भावनात्मक सहयोग और सही इलाज के जरिए कई कीमती जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। ये रहे मौजूद कार्यक्रम में मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेमराज मीना, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष गुप्ता, चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. जीतेन्द्र मीना, डॉ. आदर्श जिंदल, डॉ. अपूर्वा सिंह, साइकेट्रिक नर्स गौरव गोयल और सीआरए गौरव शर्मा सहित कई नर्सिंगकर्मी मौजूद रहे।