करौली में बुधवार को जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक जनसमस्याओं, विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच संपन्न हुई। बैठक में जनप्रतिनिधियों और विधायकों ने अधिकारियों को पेयजल संकट, स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे, फर्जी मस्टररोल और लंबित भर्तियों जैसे विभिन्न मुद्दों पर घेरा। कई सदस्यों ने बैठक को केवल खानापूर्ति बताते हुए कहा कि हर बार समस्याएं उठाई जाती हैं, लेकिन समाधान धरातल पर नजर नहीं आता। यह बैठक जिला परिषद सभागार में जिला प्रमुख शिमला देवी की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी। मुख्य कार्यकारी अधिकारी लखनसिंह ने पिछली बैठक की अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिस पर कई सदस्यों ने असंतोष व्यक्त किया। उनका कहना था कि रिपोर्ट में दर्शाए गए समाधान जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। करौली विधायक दर्शनसिंह गुर्जर ने जिला चिकित्सालय के नए भवन में सेवाएं शुरू न होने और पुराने भवन में सेटेलाइट अस्पताल चालू न होने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) से जवाब तलब किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। विधायक ने कोटा छावर गांव की जाटव बस्ती में पेयजल संकट और चंबल परियोजना से पानी न पहुंचने का मुद्दा भी उठाया। विधायक दर्शनसिंह गुर्जर ने जल संसाधन विभाग की जमीनों पर अवैध कब्जों को लेकर अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया। इसी बैठक में सपोटरा विधायक हंसराज मीना ने आंगनबाड़ी भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। बैठक के दौरान वन विभाग और जलग्रहण विभाग के कार्यों में फर्जी मस्टररोल और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए। विधायक दर्शनसिंह गुर्जर ने डांग विकास बोर्ड में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का मुद्दा उठाते हुए अब तक वसूली न होने पर सवाल उठाए। जिला परिषद सदस्य रामसिंह ने विधायक कोष से मिली एम्बुलेंसों के संचालन न होने की शिकायत की। वहीं, सदस्य सुमेर सिंह ने हिण्डौन अस्पताल में नियुक्तियों में अनियमितता के आरोप लगाए। पेयजल संकट, फॉगिंग, बिजली व्यवस्था और ट्रांसफार्मर बदलने जैसे अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा की गई। अंत में, जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ने अधिकारियों को बैठक में उठाए गए सभी मामलों का समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।