जसोल में शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर किशन सिंह और हरिशचंद्र सिंह जसोल ने नागाणा स्थित कुलदेवी श्री नागणेच्या माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। श्री नर्बदेश्वर महादेव मंदिर, जसोल के महंत गणेशपुरी महाराज के सान्निध्य में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुए पूजन में क्षेत्रवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई। इस दौरान पालिया में निर्माणाधीन मां चक्रेश्वरी के भव्य मंदिर और नागाणा में बन रहे श्री राजपूत विश्राम गृह से जुड़े कार्य भी चर्चा के केंद्र में रहे। मां चक्रेश्वरी मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव वर्ष 2027 में भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (भादवा बीज) के अवसर पर आयोजित किया जाएगा। कुलदेवी की आराधना हमारी गौरवशाली परंपरा का अभिन्न अंग : किशन सिंह किशन सिंह जसोल ने कहा कि मां नागणेच्या उनकी आराध्य कुलदेवी हैं और उनके प्रति अटूट श्रद्धा एवं विश्वास पीढ़ियों से चली आ रही गौरवशाली कुलपरंपरा का अभिन्न अंग है। कुलदेवी की आराधना पूर्वजों के आदर्शों, धार्मिक संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़े रखने के साथ जीवन में धर्मनिष्ठा, कर्तव्यबोध एवं सदाचार की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि शारदीय नवरात्र की सप्तमी आदिशक्ति मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की उपासना को समर्पित है। इस पावन अवसर पर कुलदेवी के दर्शन और पूजा-अर्चना का सौभाग्य विशेष आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है। उन्होंने मां से समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता बनाए रखने तथा भावी पीढ़ियों को गौरवशाली परंपराओं एवं संस्कारों के प्रति समर्पित रखने की प्रार्थना की। कर्नाटक से लाई गई मां चक्रेश्वरी की पावन ज्योत, 2027 में होगा प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा के सचिव सुमेर सिंह वरिया ने बताया कि कुलपरंपरा के अनुसार श्री नागणेच्या माता का मूल स्वरूप मां चक्रेश्वरी है। मां चक्रेश्वरी की पावन ज्योत कर्नाटक राज्य के हासन जिले के मर्कुली गांव से विधि-विधानपूर्वक लाकर पालिया स्थित श्री राणी रूपादे जी मंदिर में स्थापित की गई है। यह ज्योत संस्थान के अध्यक्ष किशन सिंह जसोल के मार्गदर्शन में प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरिशचंद्र सिंह जसोल द्वारा पूज्य महंत नारायण गिरि महाराज एवं महंत गणेशपुरी महाराज के सान्निध्य में लाई गई थी। वर्तमान में श्रद्धालु पालिया मंदिर पहुंचकर मां चक्रेश्वरी की पावन ज्योत के दर्शन कर रहे हैं। मां चक्रेश्वरी मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर सुमेर सिंह वरिया ने बताया कि मंदिर परिसर में मां चक्रेश्वरी के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। निर्माण पूरा होने के बाद वर्ष 2027 में भाद्रपद शुक्ल द्वितीया यानी भादवा बीज के शुभ अवसर पर भव्य प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इस दौरान पावन ज्योत को नवनिर्मित मंदिर के गर्भगृह में विधि-विधान के साथ प्रतिष्ठित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण कुलदेवी की प्राचीन आराधना परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे पालिया में श्रद्धालुओं को मां चक्रेश्वरी की आराधना के लिए स्थायी धार्मिक स्थल मिलेगा और देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं की सहभागिता से यह आयोजन विशेष स्वरूप लेगा। राठौड़ वंश की धार्मिक विरासत को मिलेगी नई पहचान : कुँवर हरिशचंद्र सिंह हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि राठौड़ वंश की आराध्य कुलदेवी मां नागणेच्या के मूल स्वरूप मां चक्रेश्वरी का पालिया में बन रहा भव्य मंदिर गौरवशाली इतिहास, पूर्वजों की आस्था और प्राचीन कुलपरंपराओं का प्रतीक बनेगा। मंदिर के माध्यम से कुलदेवी की ऐतिहासिक आराधना परंपरा को संरक्षित करने के साथ भावी पीढ़ियों को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में होने वाला प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव संपूर्ण राठौड़ वंश और उससे उद्भूत विभिन्न वंशीय शाखाओं के परिवारों के लिए गौरव का अवसर होगा। देश के विभिन्न राज्यों में रहने वाले परिवारों को अपनी आराध्य कुलदेवी के श्रीचरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करने और पूर्वजों की परंपराओं के प्रति आस्था प्रकट करने का अवसर मिलेगा। महोत्सव का उद्देश्य परंपरा को व्यापक स्वरूप देना उन्होंने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य कुलदेवी की प्राचीन उपासना परंपरा को व्यापक स्वरूप देना, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना और नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास तथा सनातन संस्कृति के आदर्शों से परिचित कराना है। उन्होंने बताया कि प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में राठौड़ वंश की विभिन्न शाखाओं के परिवारों के साथ छत्तीस कौम को भी सादर आमंत्रित कर व्यापक सहभागिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। सर्वसमाज की भागीदारी से धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता, आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक एकता को मजबूती मिलेगी। इस अवसर पर उन्होंने मां नागणेच्या और मां चक्रेश्वरी से समस्त श्रद्धालुओं, समाजबंधुओं एवं क्षेत्रवासियों के मंगलमय जीवन, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और सर्वांगीण उन्नति की कामना की। नवरात्र की सप्तमी शक्ति, साहस और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक : महंत गणेशपुरी महंत गणेशपुरी महाराज ने शारदीय नवरात्र की सप्तमी के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दिन आदिशक्ति मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की विशेष उपासना की जाती है। मां कालरात्रि शक्ति, साहस और निर्भयता की प्रतीक हैं। उनकी आराधना भक्तों को भय, संकट और नकारात्मक प्रवृत्तियों से मुक्त होकर सत्य, धर्म एवं सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में कुलदेवी की आराधना का विशेष महत्व है। कुलदेवी के प्रति श्रद्धा एवं समर्पण परिवारों में धार्मिक संस्कारों, सदाचार, कर्तव्यबोध और धर्मनिष्ठा को मजबूत करते हैं। नवरात्र का पर्व आत्मशुद्धि, संयम, साधना, सेवा और परोपकार के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा देता है। पालिया में निर्माणाधीन मां चक्रेश्वरी मंदिर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों का निर्माण एवं संरक्षण सनातन संस्कृति की प्राचीन परंपरा है। ऐसे कार्यों में सर्वसमाज की सामूहिक सहभागिता से धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति श्रद्धा सुदृढ़ होती है। मां चक्रेश्वरी का मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए कुलदेवी की उपासना और धार्मिक संस्कारों का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। राजपूत विश्राम गृह के निर्माण कार्य का लिया जायजा नागाणा स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद हरिशचंद्र सिंह जसोल ने मंदिर परिसर में बन रहे राजपूत विश्राम गृह का भी जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्यों की जानकारी लेते हुए राजपूत समाज के लोगों से इस कार्य में सहयोग करने की अपील की। इस अवसर पर मां नागणेच्या के दरबार में समस्त प्राणिमात्र के कल्याण, विश्वशांति, सामाजिक सद्भाव, धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण तथा क्षेत्र की निरंतर प्रगति, सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रार्थना की गई।