किशनगढ़बास नगरपालिका क्षेत्र के गुर्जर वाटी मोहल्ले में गुर्जर समाज के एक परिवार ने अपनी बेटियों को घोड़ी पर बिठाकर बिंदोरी निकाली। गुर्जर वाटी निवासी शिवहरी गुर्जर के परिवार ने वर्षों से चली आ रही रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ते हुए अपनी बेटियों वर्षा और दीक्षा की शादी से पहले सभी रस्में उसी प्रकार निभाईं, जैसे आमतौर पर बेटों के लिए निभाई जाती हैं। रविवार को होने वाली शादी से पहले दोनों बेटियों को सजे-धजे घोड़ी पर बिठाया गया और गाजे-बाजे के साथ पूरे मोहल्ले में बिंदोरी निकाली गई। इस दौरान माहौल पूरी तरह उत्सवमय नजर आया। बिंदोरी में शामिल महिलाएं, पुरुष, बच्चे और रिश्तेदार ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर झूमे। वर्षा और दीक्षा की सहेलियों व परिवारजनों ने नाच-गाकर खुशी का इजहार किया। दुल्हन के पिता शिवहरी गुर्जर ने बताया- समय के साथ समाज में बेटियों के प्रति सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब लोग बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि गर्व मानने लगे हैं। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल रस्म निभाना नहीं, बल्कि समाज में यह संदेश देना है कि बेटा और बेटी दोनों समान हैं। इस अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। पूर्व विधायक रामहेत यादव, भाजपा नेता राजेश बटवाडा, हेमेंद्र चौधरी, बनेसिंह नरुका, लीलू पंडित और जेपी गुर्जर सहित अन्य लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों की बिंदोरी निकालना एक प्रतीकात्मक कदम है, जो समाज में व्याप्त भेदभाव को खत्म करने की दिशा में प्रेरणा देता है। वर्षा और दीक्षा के मामा ने भी भावुक होते हुए कहा कि बेटा-बेटी में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को सही दिशा मिलती है और समाज में समानता का वातावरण बनता है।