सरकारी अस्पताल में सिजेरियन के बाद दो प्रसूताओं की मौत और एक महिला की तबीयत बिगड़ने के गंभीर मामले में इस्तेमाल की गई दवाएं और इंजेक्शन एक बार फिर संदेह के घेरे में आ गए हैं। मामले की जांच में सामने आया है कि इंजेक्शन दिए जाने के तुरंत बाद मरीजों को तेज कंपकंपी छूटने लगी थी। इसके बाद ड्रग विभाग की टीम ने संबंधित इंजेक्शन सहित छह अलग-अलग दवाओं के सैंपल ले लिए हैं और उन्हें लैब टेस्ट के लिए भेजj जा रहा है। सुरक्षा के लिहाज से इन सभी छह दवाओं के इस्तेमाल और सप्लाई पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। सहायक औषधि नियंत्रक प्रहलाद मीणा के अनुसार, रविवार को टीम ने अस्पताल पहुंचकर पीड़ित मरीजों को दी गई दवाओं के सैंपल जुटाए। घटना के पहले दिन एक फ्लूइड (आईवी फ्लूइड) पर संदेह जताया गया था, लेकिन पूर्व की जांच रिपोर्ट में वह मानकों के अनुरूप पाया गया। इन 6 दवाओं के विशेष बैच की सप्लाई पर लगी रोक मेरोपेनम इंजेक्शन (1 ग्राम): बैच नंबर D0032631B मेरोपेनम इंजेक्शन (1 ग्राम): बैच नंबर D0032640A एनएस (NS) 100 एमएल: बैच नंबर 2614041065 हाइड्रोकोर्टिसोन सोडियम सक्सीनेट इंजेक्शन: बैच नंबर HC125095 डोपामाइन हाइड्रोक्लोराइड इंजेक्शन: बैच नंबर DHA12505 पेरासिटामोल इन्फ्यूजन: बैच नंबर 26EPC013 रोशन की मौत पर क्या बोले डॉक्टर अस्पताल प्रशासन के अनुसार प्रसूता रोशन को पुराने टांकों वाली जगह पर दर्द की शिकायत के कारण लेबर रूम में भर्ती कराया गया था। वह कुपोषण से पीड़ित थीं, हालांकि उनकी सोनोग्राफी रिपोर्ट सामान्य आई थी। रात करीब 12 बजे दर्द बढ़ने पर डॉक्टरों ने सर्जरी की। इसके बाद सुबह लगभग 7 बजे अचानक उन्हें घबराहट और सांस लेने में तकलीफ शुरू हो गई तथा बहुत अधिक ब्लीडिंग (रक्तस्राव) होने लगा, जिससे स्थिति बिगड़ गई।