कोटा के जेके लोन अस्पताल में एक तरफ इलाज के दौरान 5 महीने में किडनी फेल होने से 3 महिलाओं की मौत हो गई। वहीं, दूसरी तरफ अस्पताल प्रशासन को एप्रिसिएशन अवार्ड सर्टिफिकेट मिला है। इस पर अस्पताल अधीक्षक खुशी जता रहीं हैं। जमीनी हकीकत यह है कि कोटा के सरकारी अस्पतालों में लगातार महिलाओं की जान जा रही है। अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया- राजस्थान सरकार द्वारा प्रसूताओं और नवजात शिशुओं की बेस्ट मॉनिटरिंग के लिए जेके लोन मातृ एवं शिशु चिकित्सालय को एप्रिसिएशन अवॉर्ड दिया गया है। जेके लोन अस्पताल ने 92 प्रतिशत नंबर के साथ अवॉर्ड हासिल किया है। इसके तहत लेबर रूम, मैटरनल ओटी आदि के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस के अनुसार काम किया जाता है। अस्पताल अधीक्षक बोलीं- मोर्टेलिटी रेट काफी कम डॉ. निर्मला शर्मा ने आगे तर्क दिया कि अस्पताल की मैटरनल मोर्टेलिटी रेट काफी कम आ रही है। साथ ही जेके लोन अस्पताल को बारां, बूंदी, झालावाड़ और कोटा क्षेत्र के अन्य अस्पतालों की मॉनिटरिंग व मेंटरशिप की जिम्मेदारी दी गई है, जिसके तहत वे अन्य अस्पतालों को जटिल केस संभालने और गाइड करने का काम करते हैं। इसी अच्छी मेंटरशिप के लिए राज्य सरकार ने अस्पताल को यह सम्मान दिया है। अवॉर्ड के बीच हो रही मौते अधीक्षक के इन दावों से अलग जेके लोन अस्पताल और कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत और इलाज के दौरान किडनी फेलियर जैसे गंभीर मामलों का आंकड़ा चौंकाने वाला है। मेडिकल कॉलेज और उससे संबद्ध अस्पतालों में 12 दिनों में 4 मौतें हुई है। इनमें एक मौत जेके लोन और पांच महीने पहले पांच महिलाओं की मौत में भी एक मौत जेके लोन से थी। रूटीन में एक दो मौत रोज हो रही है। मई 2026 में सिजेरियन प्रसव के बाद 9 से अधिक महिलाओं के किडनी फेल होने और इन्फेक्शन फैलने के मामले सामने आए थे, जिसके चलते कई महिलाओं की जान चली गई। वहीं अस्पताल अधीक्षक का कहना है कि अस्पताल में रेफरल केस ज्यादा आते हैं जो कि बहुत गंभीर होते हैं। कई बार उन्हें बचाना मुश्किल हो जाता है। हमारी कोशिश ज्यादा से ज्यादा मरीजों को बचाने की ही होती है।