मेडिकल कॉलेज कोटा के नए अस्पताल में करीब ढाई महीने से भर्ती महिला मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला मरीज रागिनी की किडनी फेल हो गई थी। पांच मई से अस्पताल के एसएसबी ब्लॉक में भर्ती रागिनी मीणा को डॉक्टरों के परामर्श और परिजनों की सहमति के बाद सोमवार को डिस्चार्ज कर दिया गया। रागिनी के पति लोकेश ने बताया- डॉक्टरों से चर्चा के बाद रागिनी की स्थिति देखते हुए उसे हर तीन दिन बाद डायलिसिस के लिए अस्पताल लाया जाएगा। ट्रांसप्लांट के लिए कराया जाएगा रजिस्ट्रेशन वहीं किडनी काम बंद करने के 90 दिनों की अवधि पूरे होने के बाद रागिनी का राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय अंग प्रत्यारोपण संगठन में किडनी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा। इससे रागिनी को जल्द किडनी मिलने में आसानी हो सकेगी। लोकेश ने बताया- प्रशासन और पीड़ित परिवार के बीच जो पहले समझौता हुआ था। वह लागू रहेगा और दोनों पक्ष उसी सहमति के आधार पर आगे प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। गौरतलब है कि रागिनी समेत अन्य महिलाएं 4 से 8 मई के बीच कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में डिलीवरी के लिए भर्ती हुई थीं। सिजेरियन ऑपरेशन के बाद इन सभी महिलाओं की किडनियां फेल हो गई थीं। पांच महिलाएं अभी भी भर्ती किडनी फेल मामले में पांच प्रसूताएं अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक (SSB) में भर्ती हैं। इसमें से रागिनी को अब घर ले जाया गया है। कुछ दिन पहले ही इन महिलाओं ने किडनी ट्रांसप्लांट की मांग को लेकर डायलिसिस करवाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद अस्पताल प्रशासन और महिलाओं के परिवार के बीच में बातचीत में डॉक्टर्स ने भरोसा दिलाया था कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए उन्हें प्राथमिकता में रखा जाएगा। डॉक्टर्स ने उस समय ही बता दिया था कि महिलाओं के अभी अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं है। वह घर जा सकती है और डायलिसिस के लिए डॉक्टर्स के बताए अनुसार अस्पताल आ सकती हैं।