भारतीय रेलवे के कोटा रेलवे मंडल ने अपने 74वें स्थापना दिवस पर प्रदर्शनी लगाई। विकास की गौरवशाली यात्रा को प्रदर्शनी के माध्यम से आमजन को बताया गया। वर्ष 1952 में स्थापित इस मंडल ने तकनीक और सुविधाओं के क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है। आज मेनाल ऑफिसर्स क्लब में आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन डीआरएम अनिल कालरा ने किया। प्रदर्शनी में सिग्नल प्रणाली के विकास को भी रोचक तरीके से समझाया गया। पहले जहां ट्रेन के आगे घुड़सवार दौड़कर सिग्नल देता था। वहीं आज एलईडी आधारित आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम लागू है। इंजनों में भी बदलाव आया है। अब लोको पायलट की सुविधा के लिए एआई सेंसर आधारित टॉयलेट लगाए जा रहे हैं, जो केवल ट्रेन रुकने पर ही खुलते हैं। 19 स्टेशनों को अमृत स्टेशन के रूप में डवलप किया जा रहा है। 55 किलोमीटर की रफ्तार से चलती थी, अब 180 स्पीड का किया ट्रायल डीआरएम कालरा ने बताया- 74 वर्षों में रेलवे की कार्यप्रणाली में परिवर्तन हुआ है। जहां 1952 में ट्रेनें महज 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती थीं। वहीं अब 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक का ट्रायल सफलतापूर्वक किया जा चुका है। कोटा रेल मंडल में वंदे भारत एक्सप्रेस का 180 किमी प्रति घंटे की गति से ट्रायल भी किया गया है। मंडल ‘मिशन रफ्तार’ के तहत 160 किमी प्रति घंटे की गति के लिए ट्रैक और सुविधाएं विकसित कर रहा है। सीनियर डीसीएम सौरभ जैन ने बताया- प्रदर्शनी में रेलवे के सभी विभागों ऑपरेटिंग, कमर्शियल, मेडिकल, सेफ्टी, इंजीनियरिंग, सिग्नल एवं टेलीकॉम, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल ने अपने-अपने मॉडल और कार्यप्रणाली प्रदर्शित की है। यहां पुरानी तकनीक और आधुनिक सिस्टम के बीच का अंतर भी दर्शाया गया है। कमर्शियल विभाग ने कंसेशन, आय और रेल मदद जैसे शिकायत निवारण सिस्टम की जानकारी दी। 19 स्टेशनों को अमृत स्टेशन के रूप में कर रहे डवलप यात्रियों की सुविधाओं बढ़ाने के लिए मंडल में 19 स्टेशनों को अमृत स्टेशन के रूप में डवलप किया जा रहा है। बूंदी और मांडलगढ़ स्टेशन तैयार हो चुके हैं, जबकि 17 स्टेशनों का कार्य चल रहा है। न्यू कोटा स्टेशन को मई 2026 और कोटा स्टेशन को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। प्रदर्शनी में ‘कवच 4.0’ जैसे स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा सिस्टम, अल्ट्रासोनिक रेल जांच उपकरण और विशेष रेलवे स्ट्रक्चर के मॉडल भी प्रदर्शित किए गए।