राजस्थान की माटी की महक, पूर्वोत्तर के लोक संगीत की लय, दक्षिण भारत की सांस्कृतिक विरासत और हिमालय से लेकर समुद्र तटों तक की लोक परंपराएं। देश की विविध लोक संस्कृतियों का संगम मंगलवार को जवाहर कला केंद्र (जेकेके) में देखने को मिला। जहां 29वें राष्ट्रीय लोक कला महोत्सव ‘लोकरंग-2026’ का आगाज हुआ। 6 नवंबर तक चलने वाले 11 दिन के महोत्सव में देशभर के लोक कलाकार संगीत, नृत्य और वेशभूषा से सांस्कृतिक विविधता को मंच पर प्रस्तुत कर रहे हैं। 22 राज्यों के कलाकारों की भागीदारी वाले आयोजन में लोक नृत्य, पारंपरिक संगीत और क्षेत्रीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां लोकरंग के तहत शिल्पग्राम में हस्तशिल्प मेले का भी आयोजन किया जा रहा है। पहले दिन 20 से ज्यादा स्टॉल खाली नजर आईं। यहां तक की कई फूड स्टॉल भी शुरू नहीं हो पाई। यहां आर्टिजन अधिकारियों के पीछे-पीछे भागते नजर आए, जहां वे अपनी स्टॉल का आवंटन करने की मांग करते दिखे। यहा रूडा की ओर से करीब 85 स्टॉल दी गई। बाकी सभी स्टॉल आवंटन जवाहर कला केंद्र प्रशासन कर रहा है। 'आओ आओ रे' के सुरों से हुई शुरुआत जवाहर कला केंद्र की महानिदेशक शुचि त्यागी, अतिरिक्त महानिदेशक गोपाल राम बिरदा और आईएएस मनीषा अरोड़ा ने महोत्सव का उद्घाटन किया। उद्घाटन गीत 'आओ आओ रे' की सुरीली गूंज के साथ समारोह का आगाज हुआ। इसके बाद मांगणियार कलाकारों के साथ मंच पर नन्हे बच्चों ने खड़ताल बजाते हुए गीत पेश किया। मुक्ताकाशी मंच पर देश के अलग-अलग अंचलों की लोक कलाओं ने समां बांध दिया। पंजाब के लुड्डी लोकगीत पर लड़कियों ने जोशीला नृत्य किया। राजस्थान की चरी में महिला कलाकारों ने सिर पर जलती चरी रखकर संतुलन और नफ़ासत का बेमिसाल नज़ारा पेश किया। मणिपुर के कलाकारों ने चेरोल जगोई में स्टिक पर संतुलन साधते हुए नृत्य किया, जबकि हिमाचल प्रदेश की नाटी, राजस्थान का घूमर और मणिपुर का लाई हरोबा भी मंच पर सजे। छत्तीसगढ़ की गेड़ी, जम्मू-कश्मीर की जागरणा और पुरुलिया छऊ में महिषासुर की प्रस्तुति ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। शिल्पग्राम में भी लोक कलाकारों ने अपना हुनर दिखाया। निवाई के बनवारी जाट ने कच्छी घोड़ी, सीकर के बुंदू खां ने लोक गायन और जयपुर की कमली सपेरा ने कालबेलिया नृत्य पेश किया। दौसा की लाली ने पद गायन से समां बांध दिया। शिल्पग्राम में 150 शिल्पकारों की कारीगरी लोक कला की प्रस्तुतियों के साथ जेकेके के शिल्पग्राम में राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का आयोजन भी किया जा रहा है। यहां लगभग 150 शिल्पकार अपने पारंपरिक हुनर और उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। मेले में हथकरघा वस्त्र, पारंपरिक आभूषण, टेराकोटा, काष्ठ कला, चमड़े की नक्काशी, लोक चित्रकला और धातु शिल्प सहित विभिन्न हस्तशिल्प देखने और खरीदने का अवसर मिल रहा है।