आरएनटी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (एसएसएच) में दवा लेने के लिए मरीजों की कतारें दिनों-दिन लंबी होती जा रही हैं, लेकिन इसके पीछे की जो प्रशासनिक वजह चौंकाने वाली है। एसएसएच को खुले करीब 6 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज तक यहां के दवा वितरण केंद्रों (डीडीसी) के लिए सरकार स्तर से फार्मासिस्ट का एक भी पद स्वीकृत नहीं किया गया है। अभी सिर्फ व्यवस्थार्थ यानी अस्थायी तालमेल के जरिए काम चलाया जा रहा है। अस्पताल में व्यवस्था बनाने के लिए टीबी हॉस्पिटल (बड़ी) से तीन फार्मासिस्ट उधार लिए गए हैं। वहीं सीएमएचओ कार्यालय से दो फार्मासिस्ट भेजे गए हैं, लेकिन उन्होंने खुद को फर्स्ट ग्रेड बताते हुए दवा बांटने (डिस्पेंसिंग) का काम करने से इनकार कर दिया है। इसके चलते वे अस्पताल में ड्यूटी तो दे रहे हैं, लेकिन मूल कार्य नहीं कर रहे हैं। वर्तमान में खिड़कियों को संभालने के लिए एमबी हॉस्पिटल से 7 नियमित और 8 ठेके पर कार्यरत फार्मासिस्ट लेकर जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। अस्पताल में यहां हैं दवा केंद्र दावे फेल : दो दिन में काउंटर खोलने की बात कही थी, अब तक नहीं खुले मरीजों की लगातार बढ़ती भीड़ के बावजूद सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में अब तक कोई नया दवा काउंटर नहीं खुल सका है। जबकि अस्पताल अधीक्षक डॉ. विपिन माथुर ने दो दिन में काउंटर शुरू करने का दावा किया था। अस्पताल में विशेषकर सोमवार, गुरुवार और शनिवार को मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे मौजूदा काउंटर नाकाफी साबित हो रहे हैं। जरूरत इसलिए... अब आईएचएमएस में जुड़ेंगी डिजिटल पर्चियां, नेट धीमा हुआ तो बढ़ेगी आफत आने वाले दिनों में आईएचएमएस सॉफ्टवेयर में अब डॉक्टरों की पर्चियां सीधे डिजिटल माध्यम से जुड़ेंगी। डॉक्टर मरीज का जो पर्चा ऑनलाइन तैयार करेंगे, वही सीधे डीडीसी काउंटर के कंप्यूटर पर खुलेगा और फार्मासिस्ट उसी आधार पर दवा देगा। इसके लिए डॉक्टरों को टैबलेट, नेट कनेक्शन और कंप्यूटर ऑपरेटर दिए जाएंगे। इस व्यवस्था में पेंच यह है कि यदि इंटरनेट की स्पीड धीमी रही या सर्वर डाउन हुआ तो दवा वितरण प्रक्रिया ठप हो जाएगी। 2 माह के लिए मिले फार्मासिस्ट, काम नहीं करेंगे तो क्या फायदा? हमें सीएमएचओ कार्यालय से सिर्फ दो महीने के लिए फार्मासिस्ट दिए गए हैं। यदि वे भी काम नहीं करेंगे तो हमारे किस काम के? इस पर जल्द ही उच्च स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। मरीजों की सुविधा के लिए ओपीडी और डीडीसी के सामने दो स्क्रीन डिस्प्ले लगा रहे हैं, ताकि लोग बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर सकें। प्रधानाचार्य से अस्पताल की पीछे वाली गली में खाली पड़ी एक डीडीसी जगह मांगी गई है। वहां काउंटर शुरू होते ही मुख्य भवन का भार कम हो जाएगा। बुजुर्गों के लिए बेंच लगाई जा रही हैं। सरकार को फार्मासिस्ट के पदों की स्वीकृति के लिए कई बार प्रस्ताव भेजे हैं। -डॉ. विपिन माथुर, अधीक्षक, एसएसएच