बांसवाड़ा के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में शुक्रवार सुबह 2 घंटे के भीतर 2 प्रसूताओं की मौत हो गई। दोनों महिलाओं ने पहली बार संतान को जन्म दिया था, लेकिन वे अपनी संतान के साथ 24 घंटे भी नहीं रह पाईं और दुनिया छोड़ गईं। आईसीयू में भर्ती इन प्रसूताओं में से एक महिला सीवियर एनीमिक थी, यानी उसके शरीर में खून की गंभीर कमी थी। दूसरी प्रसूता की मौत रक्तचाप बढ़ने से हुई है। उसके नवजात शिशु की हालत भी गंभीर बनी हुई है। एक के बाद एक हुई दो प्रसूताओं सवनिया निवासी लक्ष्मी और कानेला निवासी लीला की मौत ने न केवल हॉस्पिटल प्रशासन बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग को सकते में डाल दिया है। वहीं प्रशासन के दावों और जिले की चिकित्सा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। ऑपरेशन के महज 24 घंटे के भीतर हुई इन दोनों मौतों के बाद हॉस्पिटल प्रशासन ने जांच के लिए 5 डॉक्टरों की टीम बनाई है। लक्ष्मी के शरीर में 7 ग्राम से कम था हीमोग्लोबिन सवनिया निवासी लक्ष्मी (21) की शादी साल 2023 में अरविंद के साथ हुई थी। शादी के 3 साल बाद उसने पहली संतान के रूप में बेटी को जन्म दिया। हॉस्पिटल सूत्रों के अनुसार लक्ष्मी खून की गंभीर कमी से जूझ रही थी और उसके शरीर में हीमोग्लोबिन 7 ग्राम से भी कम था। ऑपरेशन के लिए उसे एक यूनिट खून चढ़ाया गया था। लेकिन ऑपरेशन के कुछ घंटे बाद लक्ष्मी का रक्तचाप, नाड़ी और हृदय गति, सांस लेने की गति और ऑक्सीजन स्तर कम हो गया। ऐसे में वह अपनी बेटी के साथ 24 घंटे भी नहीं गुजार पाई और उसकी मौत हो गई। लीला के बेटे की हालत भी नाजुक कानेला निवासी लीला (32) की शादी साल 2024 में विजय के साथ हुई थी। पति-पत्नी दोनों ग्रेजुएट हैं। डॉक्टरों के अनुसार लीला ने पहली संतान के रूप में बेटे को जन्म दिया, लेकिन सिजेरियन डिलीवरी के 24 घंटे के भीतर उसकी मौत हो गई। प्रारंभिक तौर पर उसकी मौत का कारण रक्तचाप बढ़ना माना जा रहा है। वहीं उसके नवजात बेटे की हालत भी गंभीर बनी हुई है। बच्चे को एसएनसीयू में भर्ती कर ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है, जहां उसकी हालत अभी भी अस्थिर बनी हुई है। पति विजय ने बताया कि पहले लीला को गढ़ी सीएचसी ले जाया गया था, जहां से उसे महात्मा गांधी हॉस्पिटल बांसवाड़ा रेफर किया गया था। आईसीडीएस और चिकित्सा विभाग की भूमिका पर उठे सवाल इन दोनों मौतों के बाद आईसीडीएस और चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। 21 साल की गर्भवती लक्ष्मी खून की गंभीर कमी से जूझ रही थी तो आईसीडीएस की कार्यकर्ता और चिकित्सा विभाग की एएनएम ने समय रहते ध्यान क्यों नहीं दिया। दोनों विभागों ने हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए प्रयास क्यों नहीं किए। यदि किए गए तो नतीजा मौत के रूप में क्यों सामने आया। लीला को समय रहते भर्ती क्यों नहीं कराया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सुपरवाइजर ने उसकी सुध क्यों नहीं ली। दोनों गर्भवतियों का यह पहला प्रसव था। ऐसे में विशेष निगरानी क्यों नहीं रखी गई और पोषण तथा नियमित स्वास्थ्य जांच पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। दोनों को बचाने के पूरे प्रयास किए गए : अस्पताल प्रशासन मेडिकल कॉलेज बांसवाड़ा के प्रिंसिपल डॉ. योगेश काचा ने बताया कि प्रसूता लक्ष्मी सीवियर एनीमिक थी। प्रथम दृष्टया उसकी मौत का कारण अचानक वाइटल डाउन होना सामने आ रहा है। बच्चा सुरक्षित है और परिजनों की मंशा के अनुसार उसे उनके सुपुर्द कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि लीला ने तय तिथि से करीब 15 दिन बाद बच्चे को जन्म दिया था और वह गंभीर हालत में हॉस्पिटल पहुंची थी। दोनों महिलाओं को बचाने के लिए डॉक्टरों ने पूरे प्रयास किए लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉ. काचा ने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए 5 डॉक्टरों की टीम बनाई गई है। 3 इंजेक्शन के सैंपल जांच के लिए लिए गए कोटा और बीकानेर के बाद अब बांसवाड़ा में भी प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आने के बाद चिकित्सा विभाग हरकत में आ गया है। सीएमएचओ, मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल और पीएमओ सहित कई डॉक्टर महात्मा गांधी हॉस्पिटल पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी जुटाई। आनन-फानन में पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड से जांच के लिए 3 इंजेक्शन के सैंपल भी लिए गए। इनमें मैग्नीशियम सल्फेट इंजेक्शन, सोडियम क्लोराइड आईवी और कंपाउंड सोडियम लैक्टेड आईवी के सैंपल शामिल हैं। इन सैंपलों को जांच के लिए भेजा जाएगा।