जयपुर में इन दिनों कला और रचनात्मकता की अलग तस्वीर नजर आ रही है। मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनआईटी) में मंगलवार से 6 दिवसीय नेशनल क्रिएटिव आर्ट फेस्ट कारि 2026 का आगाज हुआ। यह आयोजन एमआईटी-एडीटी यूनिवर्सिटी, पुणे के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। जेएलएन मार्ग स्थित एमएनआईटी के वीएलटीसी सभागार में शुरू हुए इस आर्ट फेस्ट में रंगों, रचनात्मकता और कल्पनाओं की अनोखी दुनिया देखने को मिली। कहीं कलाकार कैनवास पर प्रकृति के सुंदर दृश्य उकेर रहे हैं तो कहीं चित्रों के माध्यम से मानव मन की भावनाओं और पीड़ा को अभिव्यक्त किया जा रहा था। कुछ कलाकार आसमान की नीली छटा को रंगों में ढाल रहे हैं। कुछ नारी सौंदर्य की कलात्मक व्याख्या करते नजर आए। इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स को सामने बैठाकर उनकी पेंटिंग बनाई। नई शिक्षा नीति के तहत आयोजित इस फेस्ट में राजस्थान और पुणे के 35 से अधिक कलाकार भाग ले रहे हैं, जो तीन दिनों तक अलग-अलग थीम पर आधारित सजीव चित्रकारी प्रस्तुत करेंगे। साथ ही अन्य कला विधाओं के कलाकार भी अपनी कला का लाइव डेमो दे रहे हैं। इन कलाकारों के साथ एमएनआईटी और एमआईटी-एडीटी के लगभग 60 छात्र भी कला की बारीकियां सीख रहे हैं। फेस्ट के दौरान पेंटिंग वर्कशॉप के साथ-साथ क्ले मॉडलिंग और स्कल्पचर की डेमो क्लास भी आयोजित की गई। प्रसिद्ध कलाकार हंसराज चित्र भूमि कुमावत ने क्ले मॉडलिंग का लाइव प्रदर्शन किया, जबकि प्रो. उत्तम जनवाड़े ने लाइव पोर्ट्रेट बनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पद्मश्री कलाकार रहे मौजूद इससे पहले एमएनआईटी के प्रभा भवन स्थित दीक्षा सभागार में दीप प्रज्ज्वलन के साथ फेस्ट का औपचारिक उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध चित्रकार एस. शाकिर अली थे, जबकि अध्यक्षता एमएनआईटी के कार्यकारी निदेशक प्रो. ए.बी. गुप्ता ने की। विशिष्ट अतिथियों में कला मर्मज्ञ प्रो. चिन्मय मेहता, फड़ आर्टिस्ट कल्याण जी जोशी, संस्कार भारती के एसोसिएट हेड महावीर भारती और नेशनल अवॉर्ड विजेता कलाकार विजय धोरे शामिल रहे। इस अवसर पर एमएनआईटी के आर्किटेक्चर और प्लानिंग विभाग के प्रमुख प्रो. राजीव श्रृंगी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डाला। फेस्ट में प्रो. तुषार पांखे, रघुनाथ शर्मा, युगल किशोर शर्मा, पुष्पा दुल्लार, मानक प्रजापत, दीपिका माली, रेखा अग्रवाल, अमन शर्मा और मेघा तिवारी सहित कई कलाकारों ने अपनी कला का सजीव प्रदर्शन किया।