राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल (आरएसओएस) में अंकतालिकाओं में हेरफेर कर फर्जी अंकतालिकाएं तैयार करने के बड़े खेल का खुलासा हुआ है। आंतरिक जांच रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों (2021-2025) में 1107 अंकतालिकाओं में फर्जी संशोधन किए गए। इन संशोधनों में नाम और जन्मतिथि तक बदल दी गई। जांच रिपोर्ट केवल दैनिक भास्कर के पास मौजूद है। जांच में सामने आया कि प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए संविदा पर लगे राकेश कुमार शर्मा को डीओआईटी ने सुपर एडमिन के अधिकार दे दिए थे, जबकि ऐसे अधिकार संस्थान में किसी अन्य के पास नहीं थे। रिपोर्ट के अनुसार आरोपी ने न केवल फेल छात्रों को पास किया, बल्कि ऐसे लोगों के नाम भी अंकतालिकाएं जारी कर दीं जिन्होंने न आवेदन किया और ना ही परीक्षा दी थी। अधिकांश संशोधन एसएसओ आईडी RKS4161 से किए गए और ये कार्यालय समय के बाद चोरी छिपे किए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संविदाकर्मी का पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं कराया गया था। साइबर क्राइम-ऑनलाइन फ्रॉड की श्रेणी में मामला; पैसों के लेन-देन की भी जांच होगी जांच में सामने आया कि गोपनीय अनुभाग ने 928 अंकतालिकाओं में संशोधन किए, जबकि एसएसएस अनुभाग ने 3642 मामलों में नाम, माता-पिता के नाम और जन्मतिथि में बदलाव किए। हालांकि इन संशोधनों का पूरा रिकॉर्ड समिति को उपलब्ध नहीं कराया गया। जांच में इनमें से 1107 संशोधन फर्जी मिले। पूरे प्रकरण को साइबर क्राइम और ऑनलाइन फ्रॉड में रखा है। मामले की एसओजी से जांच कराने की सिफारिश भी है, ताकि फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों और संभावित वित्तीय लेनदेन का पता लगाया जा सके। सबसे पहले भास्कर ने किया था खुलासा, अब जांच में खुली परतें राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल में अंक तालिकाओं में फर्जीवाड़े का मामला सबसे पहले दैनिक भास्कर ने उजागर किया था। शुरुआती रिपोर्ट में ही अंक तालिकाओं में हेरफेर और संदिग्ध संशोधनों की ओर ध्यान दिलाया था। इसके बाद विभाग को जांच करानी पड़ी। अब आंतरिक जांच रिपोर्ट में वही तथ्य सामने आए हैं, जिनकी ओर भास्कर ने पहले ही संकेत किया था। स्टेट ओपन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल रिपोर्ट में कहा गया है कि संस्थान में डेटा संशोधन की कोई समय सीमा तय नहीं है। परीक्षा के वर्षों बाद भी अंकतालिकाओं में बदलाव संभव है, जिसका दुरुपयोग किया गया। आयु सत्यापन की भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। वहीं, डीओआईटी द्वारा 2017 में विकसित की गई ऑनलाइन एप्लीकेशन को रिपोर्ट में फुलप्रूफ नहीं माना गया है। भास्कर सवाल; फर्जीवाड़े के बाद जवाबदेही तय कैसे होगी?