बाल लिंगानुपात में पिछले एक दशक में सुधार तो हुआ है, लेकिन लगातार नहीं रहा। वर्ष-2016 में जहां 1000 लड़कों पर 806 लड़कियां थी। वहीं वर्ष-2025 में आंकड़ा बढ़कर 905 हो गया। यानी 10 साल में बाल लिंगानुपात में 99 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। हालांकि वर्ष 2020 में 913 के स्तर में पर पहुंचने के बाद उचार-चढ़ाव बना रहा। पिछले पांच साल से आंकड़ा 900 के आसपास आकर ठहर गया है। यह खुलासा भास्कर की ओर से आंकड़ों के एनालिसिस के आधार पर किया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में भ्रूण लिंग जांच में लिप्त लोगों को रंगे हाथों पकड़ने की योजना के तहत अब तक 179 डिकोय ऑपरेशन किए जा चुके है। इसके अलावा इंटर स्टेट 51 डिकोय कार्रवाई की जा चुकी है। किस साल कितना (स्रोत: सरकारी आंकड़ों के अनुसार) मां-बाप से बेटी के पैदा होते ही रजिस्ट्रेशन करवाने की अपील पिछले 10 साल में 99 अंक का सुधार होना अच्छी बात है, लेकिन मां-बाप को बेटी पैदा होते ही जन्‍म प्रमाण पत्र के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना चाहिए, जिससे बेटियों का ग्राफ भी बढ़ेगा और अधिकार भी मिलेंगे। तभी जेंडर समानता हो सकती है। ऐसे में नवरात्रा के समय बेटियों की संख्या बढ़ी है, जिससे न केवल उन्हें सम्मान मिलेगा बल्कि यह सुखद समाचार है। 5 साल में 17 अंकों का सुधार : वर्ष-2020 में बाल लिंगानुपात 905 रहा। इस अवधि में बीच के वर्षों में गिरावट और सुधार दोनों देखने को मिले। वर्ष-2021 में 25 अंकों की गिरावट के बाद अनुपात दोबारा 900 के पार तो पहुंचा, लेकिन इसके बाद बढ़ोतरी सीमित रही। 2022 से 2025 के बीच आंकड़ा 895 से 905 का दायरे में ही रहा। (राजन चौधरी, सामाजिक कार्यकर्ता) झुंझुनूं, डीडवाना-कुचामन, अजमेर एवं श्रीगंगानगर, चूरू में 925 से ज्यादा 850 से कम : डीग (849), 851 से 875: करौली (856)धौलपुर (861), जैसलमेर (863), फलौदी (865) 876 से 900 : नागौर (877), बूंदी (878), बाड़मेर (879), बालोतरा (883), हनुमानगढ़, पाली एवं सलूम्बर (888), भीलवाड़ा (896), जोधपुर (900), 901 से 925 : बांरा (901), जयपुर (902), कोटा, ब्यावर (903), सवाईमाधोपुर (906), चित्तोड़गढ़ (908), टोंक (910), झालावाड़ (911), प्रतापगढ़ (912), सिरोही (915), डूंगरपुर और बीकानेर (916), राजसमंद (918), उदयपुर (923), -925 से अधिक : अजमेर एवं श्रीगंगानगर (931), सीकर (937),चूरू (938), झुंझुनूं (941), डीडवाना-कुचामन (944)