न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद दो महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। मामले में अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने तथ्यात्मक रिपोर्ट जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। अधीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, 40 साल की रेशमा को 13 अक्टूबर को 36 सप्ताह की प्रेग्नेंसी और पेट दर्द की शिकायत पर भर्ती कराया गया था। प्रसूता में एमनियोटिक द्रव की अधिकता और पहले भी 3 सिजेरियन हो चुके हैं। 14 अक्टूबर की सुबह टांकों के निशान पर दर्द होने पर आपातकालीन सिजेरियन ऑपरेशन कर बच्चे का जन्म कराया गया। डिलीवरी के तुरंत बाद महिला को सांस लेने में तकलीफ, बीपी में गिरावट और हार्ट रेट धीमी होने की गंभीर समस्या हुई, जिसके थ्रोम्बोएम्बोलिक अटैक (रक्त का थक्का जमना) होने की आशंका जताई गई। एक्सपर्ट की देखरेख में लाइफ सपोर्ट दवाओं (नॉरएड्रेनालिन व डोपामिन) से स्थिति में कुछ सुधार हुआ, लेकिन यूरिन आउटपुट कम रहा। हालांकि, 15 अक्टूबर सुबह करीब 3 बजे परिजन मरीज को डॉक्टर की सलाह के खिलाफ दूसरे अस्पताल ले गए। प्लेटलेट्स घटकर 21 हजार पहुंचे दूसरा मामला सुल्तानपुर निवासी 30 साल अनीता का है, जिन्हें 14 अक्टूबर को हाई ब्लड प्रेशर और 'ब्रीच प्रेजेंटेशन' (बच्चे का उल्टा होना) की स्थिति में भर्ती कराया गया था। दोपहर आपातकालीन सिजेरियन किया गया। अगले दिन 15 अक्टूबर की सुबह महिला को सांस फूलने, यूरिन में खून आने और पल्स रेट बढ़ने की शिकायत हुई। जांच में महिला की प्लेटलेट्स गिरकर महज 21,000 रह गईं, लिवर एंजाइम और एलडीएच का स्तर काफी बढ़ गया तथा फेफड़ों व पेट में फ्लूइड जमा पाया गया। डॉक्टरों के अनुसार यह 'HELLP सिंड्रोम' और थ्रोम्बोटिक माइक्रोएंजियोपैथी का मामला है, जिससे किडनी भी प्रभावित हुई है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि सुल्तानपुर निवासी महिला को 15 अक्टूबर शाम नेफ्रोलॉजी वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की निरंतर निगरानी में इलाज चल रहा है, फिलहाल प्रसूता की स्थिति आरामदायक है और यूरिन आउटपुट सामान्य हो रहा है।