विश्वप्रसिद्ध सितार वादक और ‘जिटार’ (Zitar) के जनक नीलाद्री कुमार ने कहा- जयपुर संगीतकारों का शहर है। इसलिए यहां से 'एक्का टूर' शुरू करेंगे। नीलाद्री कुमार का 'एक्का टूर' देश के 11 शहरों में प्रस्तुति देगा। जयपुर के दीप स्मृति ऑडिटोरियम में 4 जुलाई को होने वाली प्रस्तुति से पहले उन्होंने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत की। इस दौरान उन्होंने ‘जिटार’ के जन्म, शास्त्रीय संगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के अपने प्रयास, परिवार का रिएक्शन और 'एक्का टूर' की शुरुआत जयपुर से करने की वजह पर बात की। नीलाद्री कुमार ने टूर के जयपुर से शुरुआत करने पर कहा- यहां मैं ऑडियंस का प्रणाम करने आया हूं। यहां के श्रोता कमाल के हैं। ऐसे में यहां से शुरुआत होना बेहद गर्व की बात है। सवाल: करीब 20 साल पहले आपने जिटार (Zitar) बनाया। आखिर इसकी शुरुआत कैसे हुई? इसके पीछे क्या सोच थी? नीलाद्री कुमार: इसका जवाब छोटा देना थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि जिटार किसी एक दिन की सोच नहीं थी। यह मेरी पूरी जिंदगी के अनुभवों का नतीजा है। मैं मुंबई में पला-बढ़ा। घर के अंदर शास्त्रीय संगीत का माहौल था। बचपन से सितार सीख रहा था] लेकिन जैसे ही घर से बाहर निकलता था( वहां बिल्कुल अलग दुनिया मिलती थी। मेरे दोस्त रॉक म्यूजिक सुनते थे, फिल्मी गाने सुनते थे, वेस्टर्न म्यूजिक सुनते थे। उस समय जब आप 15-16 साल के होते हैं, तो मन में कई सवाल आते हैं। मैं सोचता था कि आखिर ऐसा क्या है उस संगीत में, जिससे युवा इतने जुड़ते हैं? और ऐसा क्या है, जो हमारे शास्त्रीय संगीत तक उनकी पहुंच नहीं बन पाती? धीरे-धीरे समझ आया कि उन्हें संगीत से ज्यादा उस संगीत से जुड़ी लाइफस्टाइल आकर्षित करती है। तब मेरे मन में विचार आया कि अगर भारतीय शास्त्रीय संगीत को उनकी भाषा में, उनकी ध्वनि और प्रस्तुति के अंदाज में सुनाया जाए तो शायद वे भी इससे जुड़ पाएंगे। इसके बाद जब मैं फिल्म इंडस्ट्री में काम करने लगा तो एक और बात महसूस हुई। हिंदी फिल्मों में वर्षों से सितार बजता आया है, लेकिन जब पूरा ऑर्केस्ट्रा साथ बजता तो कई बार सितार की आवाज उसमें खो जाती थी। यह बहुत सौम्य वाद्य है। तब लगा कि ऐसा कोई इलेक्ट्रिक वाद्य होना चाहिए, जिसमें सितार की आत्मा भी रहे और उसकी आवाज बड़े ऑर्केस्ट्रा के बीच भी साफ सुनाई दे। इन सभी अनुभवों, विचारों और वर्षों की तलाश ने मिलकर जिटार को जन्म दिया। इसलिए मैं हमेशा कहता हूं कि जिटार किसी एक दिन का आविष्कार नहीं है, बल्कि मेरी पूरी संगीत यात्रा का सार है। सवाल: आप शास्त्रीय संगीत की पांचवीं पीढ़ी से आते हैं। जब वेस्टर्न और क्लासिकल संगीत को जोड़ने का फैसला किया तो परिवार की क्या प्रतिक्रिया थी? नीलाद्री कुमार: सच कहूं तो परिवार की प्रतिक्रिया आने से पहले ही मैं यह सब करना शुरू कर चुका था। जब तक उन्हें पूरी तरह समझ में आता कि मैं क्या कर रहा हूं, तब तक मैं मंच पर जिटार बजाने लगा था। इस विषय पर मेरी कभी बाबा (पिता) से लंबी चर्चा नहीं हुई कि उन्हें कैसा लगा। मैं एक बात जरूर मानता हूं कि अगर उन्हें लगता कि मैं गलत दिशा में जा रहा हूं, या संगीत की मूल भावना से भटक रहा हूं, तो वे मुझे जरूर रोकते। उन्होंने कभी विरोध नहीं किया। उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि यह गलत है। इसलिए मैं यही मानता हूं कि उनकी मौन स्वीकृति मेरे लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद है। शायद उन्होंने महसूस किया कि मैं संगीत की आत्मा को बचाते हुए उसे नए रूप में प्रस्तुत कर रहा हूं। सवाल: 6 साल की उम्र में पहला कॉन्सर्ट किया। 15 साल की उम्र में पिता के साथ पहला एलबम। क्या चुनौती रही? नीलाद्री कुमार: हर यात्रा में कठिनाइयां होती हैं। संगीत की दुनिया भी इससे अलग नहीं है। हर दौर में अलग-अलग चुनौतियां आईं, अलग-अलग बाधाएं आईं। मैं एक बात हमेशा कहता हूं कि जब तक इंसान संगीत में डूबा रहता है, तब तक वह 'सफर' होता है, 'सफरिंग' नहीं। यानी यह यात्रा होती है, पीड़ा नहीं। जब तक आप संगीत कर पा रहे हैं। लोगों तक अपनी धुनें पहुंचा पा रहे हैं। तब तक बाकी मुश्किलें बहुत छोटी लगने लगती हैं। मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी यही रही कि संगीत ने हमेशा मुझे लोगों से जोड़े रखा। सवाल: कहा जाता है कि युवाओं को फिर से शास्त्रीय संगीत की ओर आकर्षित किया है। इसे लेकर क्या सोच थी? नीलाद्री कुमार: अगर आज युवा शास्त्रीय संगीत की तरफ लौट रहे हैं तो यह बहुत सुखद बात है। मैं तो हमेशा मानता हूं कि आज की पीढ़ी हमसे कहीं ज्यादा तेज, ज्यादा समझदार और ज्यादा जागरूक है। उन्हें सिर्फ सही चीज सही तरीके से प्रस्तुत करने की जरूरत है। नई पीढ़ी को यह बताने की जरूरत नहीं होती कि क्या अच्छा है और क्या नहीं। अगर उनके सामने ईमानदारी से संगीत प्रस्तुत किया जाए तो वे खुद उसकी गुणवत्ता पहचान लेते हैं। मुझे आज के युवाओं पर पूरा भरोसा है। वे परंपरा को भी अपनाएंगे और नए प्रयोगों को भी समझेंगे। सवाल: 'एक्का टूर' क्या है? इसकी शुरुआत जयपुर से क्यों हो रही है? नीलाद्री कुमार: 'एक्का टूर' मेरे लिए सिर्फ कॉन्सर्ट सीरीज नहीं है, बल्कि यह नई म्यूजिक यात्रा की शुरुआत है। इस टूर में हम देश के 11 शहरों में प्रस्तुति देंगे और इसकी शुरुआत मैंने जानबूझकर जयपुर से करने का निर्णय लिया। मेरी हमेशा से यह मान्यता रही है कि जयपुर संगीतकारों का शहर है। यहां के श्रोता संगीत की गहरी समझ रखते हैं। राजस्थान की अपनी समृद्ध सांगीतिक परंपरा है और जयपुर घराना पूरी दुनिया में सम्मान के साथ लिया जाता है। मुझे लगा कि अगर किसी नई यात्रा की शुरुआत करनी है तो उससे पहले जयपुर के संगीत प्रेमियों का आशीर्वाद लेना चाहिए। यहां के दर्शकों के सामने प्रस्तुति देना मेरे लिए सम्मान की बात है।