राज्य सरकार ने पतंगबाजी में इस्तेमाल होने वाले चाइनीज मांझे (काइट फ्लाइंग थ्रेड) के उपयोग, बिक्री और निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से दो दिन पहले जारी अधिसूचना में यह आदेश दिया गया है। यानी, प्रतिबंधित धागे का उपयोग या बिक्री करने पर न सिर्फ जुर्माना, बल्कि जेल भी हो सकती है। लगातार उल्लंघन करने पर सजा और कड़ी हो जाएगी। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 15 के तहत आदेशों/निर्देशों के उल्लंघन के दोषी को 5 वर्ष तक की कैद, ₹1 लाख तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। उल्लंघन जारी रहने पर ₹5,000 प्रतिदिन का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है। वहीं, उल्लंघन की अवधि बढ़ने पर सजा को 7 साल तक बढ़ाया जा सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल सादा सूती धागा, जिसमें कोई धारदार या चिपकाने वाला पदार्थ न हो, उसी का उपयोग किया जा सकेगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि नायलॉन, प्लास्टिक या किसी भी सिंथेटिक सामग्री से बने धागे, कांच, धातु या अन्य धारदार पदार्थ से लेपित मांझा मानव जीवन, पशु-पक्षियों और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। राज्य सरकार ने यह निर्णय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के 11 जुलाई 2017 के आदेश के अनुपालन में लिया है, जिसमें ऐसे खतरनाक धागों के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। आयात-परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध
राज्य सरकार की अधिसूचना में चाइनीज मांझा/सिंथेटिक धागे का निर्माण, बिक्री, भंडारण एवं सप्लाई, आयात एवं परिवहन और उपयोग पर पूर्ण तरह से प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही कोई भी सूती धागा यदि कांच, धातु या अन्य धारदार पदार्थ से लेपित है, तो वह भी प्रतिबंधित रहेगा। सामूहिक निगरानी के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी
राज्य सरकार ने आदेशों की पालना के लिए विभिन्न अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी हैं। इनमें नायब तहसीलदार स्तर तक के कार्यपालक मजिस्ट्रेट, फॉरेस्ट रेंजर या उससे ऊपर के वन अधिकारी, सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारी, नगर निकायों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी स्तर के अधिकारी और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक पर्यावरण अभियंता शामिल हैं। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन और सदस्य सचिव समय-समय पर इन निर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे। नियमों के उल्लंघन पर सजा के प्रावधान राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 15 के तहत दंड का प्रावधान है। इसमें धारा 15 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति या संस्था अधिनियम के प्रावधानों, नियमों, आदेशों या निर्देशों का उल्लंघन करती है, तो उसके लिए निम्न सजा तय है। जिला प्रशासन की भी भूमिका तय की: कलेक्टर और उपखंड मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए गए हैं कि वे राजस्व, वन, पुलिस और नगर निकायों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करें। राजस्थान : चाइनीज मांझे से 5 साल में 10 से अधिक की मौत जयपुर, 22 जनवरी-2026
कार की सनरूफ से सिर बाहर निकाले 6 साल के बच्चे का गला कटा, मौत। बीकानेर, 18 अप्रैल 2026
देशनोक में हवा में लटक रहे मांझे से 8 साल के विराट की गर्दन कटी, मौत। {जयपुर, 15 जनवरी 2025 चाइनीज मांझे से बाइक सवार युवक की गर्दन कटी, मौत।