कार्यालय संवाददाता| करौली अब कैंसर हारेगा, बेटियां जीतेंगी, यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि करौली जिले में बदलती सोच और बढ़ती जागरूकता की तस्वीर बनता जा रहा है। सर्वाइकल कैंसर से बालिकाओं को बचाने के लिए चल रहे एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान ने अब जिले में गति पकड़ ली है। जिले में कुल 18,500 बालिकाओं को यह टीका लगाया जाना है। शुरुआत में धीमी रफ्तार के के बाद अब हालात बदलने लगे हैं। अब तक 200 बालिकाओं का टीकाकरण किया जा चुका है, जबकि सोमवार को 52 बेटियों को टीका लगाया गया। जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ने खुद इस अभियान की कमान संभाली और अधिकारियों के साथ बैठक कर रणनीति बनाई। अभिभावकों को जागरूक करने के लिए विशेष संदेश जारी करने का असर यह हुआ कि शनिवार को जिला 41वें स्थान पर था और सोमवार को 36वें स्थान पर आ गया। यह अभियान 28 फरवरी को लॉन्च किया गया था और 90 दिन तक चलने वाला है। इसका उद्देश्य 14 से 15 वर्ष तक की बालिकाओं को गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर से बचाना है। सोमवार को जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ने जिला मुख्यालय स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गणेश गेट पर पहुंचकर टीकाकरण का जायजा लिया। उन्होंने टीका लगवा चुकी बालिकाओं को प्रमाण पत्र भी वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने सीएमएचओ डॉ. सतीश चंद मीणा को अधिक से अधिक चिकित्सा संस्थानों पर वैक्सीनेशन शुरू करने और सीडीईओ सर्वेश कुमार को स्कूलों में अभियान को गति देने के निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान डॉ. ऋषिराज शर्मा सहित चिकित्सा और शिक्षा विभाग के अधिकारी, स्कूल स्टाफ और अभिभावक मौजूद रहे। सवाईकल कैंसर से हो सकती है मौत सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा कैंसर) एक गंभीर लेकिन धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है, जिसके शुरुआती लक्षण अक्सर नजर नहीं आते, यहीं कारण है कि यह कई बार देर से पकड़ में आती है। इसके प्रमुख लक्षणों में पीरियड के बीच या संभोग के बाद असामान्य रक्तस्राव, दुर्गंधयुक्त या ज्यादा मात्रा में रक्त स्राव, निचले पेट या पेल्विक हिस्से में लगातार दर्द और संभोग के दौरान दर्द शामिल हैं। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, मरीज को बार-बार पेशाब आने, पेशाब में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, थकान और तेजी से वजन कम होने जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं। यह बीमारी अगर समय पर नहीं पकड़ी जाए तो गंभीर रूप ले सकती है और शरीर के अन्य अंगों जैसे फेफड़ों, लीवर और किडनी तक फैल सकती है। इसके कारण अत्यधिक रक्तस्राव से खून की कमी (एनीमिया) हो सकती है, प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है और एडवांस स्टेज में मरीज को असहनीय दर्द और जीवन की गुणवत्ता में भारी गिरावट का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकती है। सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) संक्रमण है, लेकिन राहत की बात यह है कि समय पर एचपीवी वैक्सीनेशन कराकर इस बीमारी से काफी हद तक बचाव संभव है।