राजधानी के विकास और ट्रैफिक को रफ्तार देने वाले उम्मीद की रिंग जल्द आकार लेने लगेगी। 20 साल पहले 2004 इसकी कवायद शुरू हुई थी। सात साल पहले आधी (साउथ) रिंग बन गई थी, अब बची हुई आधी (नॉर्दर्न रिंग रोड परियोजना) भी अगले तीन साल में नजर आने लगेगी। यह 10 तहसीलों से होकर गुजरेगी। 67 गांवों के 4,123 खसरों की 3,845 बीघा भूमि इस परियोजना में आएगी। इससे प्रभावित लोगों की आपत्तियां एडीएम-द्वितीय ने निस्तारण कर दी हैं। अब एनएचएआई को धारा 3डी की कार्रवाई के लिए फाइल सौंप दी है। प्रशासन संबंधित गांवों में राजस्व रिकॉर्ड और खसरों का भौतिक सत्यापन कर रहा है। निर्माण शुरू होने के बाद सड़क दो साल में तैयार हो सकती है। इसके बनने से अजमेर हाईवे से दिल्ली हाईवे जाने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा। साथ ही 10 तहसीलों में विकास का रास्ता खुलेगा। अब धारा 3डी की कार्रवाई होगी, मुआवजा तय होते ही कब्जा प्रक्रिया शुरू होगी इन गांवों से होकर गुजरेगी रिंग रोड