कार्यालय संवाददाता|करौली फूड सेफ्टी विभाग की ओर से पहली बार प्रदेश के 22 जिलों में फल-सब्जियों के 1513 सैंपल लिए गए। जब इसकी जांच रिपोर्ट आई तो विभाग ही हैरान रह गया। रिपोर्ट में 151 सैंपल में भारी मात्रा में पेस्टिसाइड (कीटनाशक) मिला है। इतना ही नहीं, तडके के लिए इस्तेमाल होने वाला खाद्य तेल भी "अनसेफ" है। 1078 सैंपलों में से 113 फेल मिले हैं। दरअसल, अब तक फूड सेफ्टी विभाग दूध, मावा, मिठाइयों और मसालों के ही सैंपल लेता आया है। पहली बार जब फल और सब्जियों के सैंपल के लिए पूरे प्रदेश में अभियान चलाया गया। हैरत की बात है कि "शुद्ध के लिए युद्ध" का दावा करने बाले सिस्टम की नाक के नीचे आमजन "धीमा जहर" निगलने को मजबूर है। विभाग ने इस चार प्राइवेट लैब से अनुबंध कर सेब, फूलगोभी, खीरा, टमाटर, बैंगन और मूली जैसी रोजमर्रा की सब्जियों के अलावा फलों के सैंपल लिए गए। इन सैंपल की रिपोर्ट में ही जहरीला सच सामने आया। फल-सब्जियों के 1513 सैंपल में से 151 में कीटनाशक, खाद्य तेल के भी 11% नमूने फेल हो गए। प्राइवेट लैब से अनुबंध कर इन सैंपलों को चैक करवाया तो इसकी रिपोर्ट में सेहत को बिगाड़ने वाले पेस्टिसाइड का खुलासा हुआ है। सैंपल रिपोर्ट में सामने आया सेब, फूल गोभी, खीरा, टमाटर, बैंगन, मूली, खीरा, अरबी सहित अन्य सब्जियों और फलों में पेस्टिसाइड मिला है। ^जिला अस्पताल करौली के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. गोविंद गुप्ता ने बताया कि सब्जियों में उपयोग होने वाला रसायन किडनी लीवर सहित अन्य अंगों को खराब करता है। न्यूरो संबंधी बीमारियां भी होती हैं। सब्जी पानी से अच्छी तरह धोने के बाद उपयोग करे। ऑर्गेनिक सब्जियों का ज्यादा उपयोग करें।