जेडीए में अधिकारियों से सीधे मुलाकात के लिए बनाया गया ऑनलाइन ई-पास सिस्टम जमीनी स्तर पर फेल नजर आ रहा है। तय जनसुनवाई समय दोपहर 3 से 5 बजे होने के बावजूद परिवादियों को जोन उपायुक्तों के कार्यालयों के बाहर इंतजार करना पड़ रहा है। कई मामलों में अधिकारी मीटिंग, फील्ड विजिट या अन्य कार्यों का हवाला देकर सीट पर मिलते ही नहीं है। भास्कर रिपोर्टर्स ने अलग-अलग दिन आमजन की तरह ई-पास बनाकर 15 जोनों में रियलिटी चेक किया। पास से एंट्री तो मिल गई, लेकिन आधे से ज्यादा जोन में अधिकारी या तो मौजूद नहीं थे या मिलने के समय सीट छोड़कर अन्यत्र चले गए। कई अधिकारी मीटिंग, फील्ड विजिट या अन्य कार्यों का हवाला देकर गायब थे। बता दें कि जेडीए में किसी भी अधिकारी से मिलने के लिए ई-पास अनिवार्य है। यह वर्किंग डे में रोज सुबह 10 बजे खुलता है। मोबाइल नंबर और ओटीपी के जरिए अधिकारी का नाम, प्रकोष्ठ और मिलने का कारण दर्ज करना होता है। ई-पास आसानी से जनरेट हो जाता है और एंट्री भी मिल जाती है। परिवादी जब कार्यालय पहुंचते हैं तो दरवाजे पर या नोटिस बोर्ड पर भी जनसुनवाई का समय 3 से 5 बजे लिखा मिलता है, लेकिन चपरासी द्वारा साहब व्यस्त हैं, विजिट पर गए हैं, या ‘मीटिंग में हैं’ कहकर इंतजार कराया जाता है। जोन मर्ज, सिस्टम में पुराने नाम; जेडीए में हाल ही में जोन 1, 3 को ए, जोन 2, 6 को बी और जोन 4, 5 को सी में मर्ज किया है। इसके अलावा पीआरएन के जोन 15 से 18 को भी एक जोन में शामिल किया है। इसके बावजूद ऑनलाइन ई-पास सिस्टम में पुराने जोन और अधिकारियों के नाम ही दिख रहे हैं, जिससे परिवादी एक फ्लोर से दूसरे फ्लोर तक भटक रहे हैं। लाइव रिपोर्ट: मिलने के समय से पहले ही ऑफिस छोड़ देते हैं जोन उपायुक्त उपायुक्त छुट्टी पर थे, फिर भी ई-पास जनरेट हो गया 5 मई को जोन-10 की उपायुक्त राधिका देवी से मिलने के लिए ई-पास बनाया गया। तय समय पर पहुंचने पर गार्ड ने पास दिखाने को कहा। इसके बाद कहा कि उपायुक्त अवकाश पर हैं। यहां कई लोग पास बनाकर पहुंचे और सबको निराश लौटना पड़ा। कई बार ई-पास बनाया, हर बार अधिकारी नहीं मिले जोन-7 के उपायुक्त अभिषेक गोयल अवकाश पर थे, लेकिन उनके नाम से ई-पास बनते रहे। 3 से 5 बजे के समय में पहुंचे परिवादी बिना मुलाकात के लौटते रहे। एक परिवादी ने बताया कि वह पहले भी आ चुके हैं, लेकिन हर बार अधिकारी नहीं मिले। सुनवाई के समय मैडम फील्ड पर निकल गईं जोन-5 के लिए पास महावीर सिंह के नाम से बना, जबकि जिम्मेदारी अपूर्वा के पास थी। तय समय पर पहुंचने पर पता चला कि वे फील्ड विजिट पर गई हैं। इस दौरान कई परिवादी इंतजार करते रहे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। मिलने के समय से पहले ही चली गईं उपायुक्त जोन-4 में उपायुक्त अपूर्वा परवाल से मिलने का समय 3 से 5 बजे था, लेकिन वे समय से पहले ही मीटिंग के लिए निकल गईं। करीब डेढ़ घंटे इंतजार के बावजूद 20 से अधिक परिवादियों को मुलाकात नहीं हो पाई। गलत रूम नंबर, अधिकारी फाइल लेकर निकल गए जोन-21 में शिवदान गुर्जर के नाम से पास बना, लेकिन जिम्मेदारी महावीर सिंह के पास थी। रूम नंबर भी गलत था। सही स्थान मिलने तक अधिकारी फाइल लेकर निकल गए और काफी देर इंतजार किया, लेकिन इसके बाद लौटे ही नहीं। जेडीसी से मिलने का स्लॉट 2 से 5 मिनट में ही फुल; जेडीसी सिद्धार्थ महाजन रोजाना केवल 15 परिवादियों से मिल रहे हैं। सुबह 10 बजे ई-पास विंडो खुलते ही 2 से 5 मिनट में सभी स्लॉट फुल हो जाते हैं। इससे कई परिवादी प्रयास के बावजूद पास नहीं बना पा रहे और मुलाकात से वंचित रह जाते हैं। जनता को चक्कर खिलाने वाले अफसर इन अफसरों से सीखें