बारां| शाहबाद घाटी के प्राकृतिक जंगल, जैव-विविधता, स्थानीय जनजीवन की रक्षा के लिए चल रहे शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन में शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां ने जन हस्ताक्षर अभियान चलाया। अभियान में लोगों ने शाहबाद क्षेत्र में प्रस्तावित हाइड्रो पावर प्लांट को दूसरी जगह लगाने की मांग की है। समिति ने 1001 हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम भेजकर मांग औपचारिक रूप से रखी है। ज्ञापन में कहा गया कि शाहबाद घाटी घने वनों, दुर्लभ वन्यजीवों, जलस्रोतों, पारिस्थितिकी संतुलन के लिए बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। प्रस्तावित हाइड्रो पावर परियोजना से जंगलों के विनाश की आशंका है। जैव-विविधता को अपूरणीय नुकसान की बात कही गई। जल प्रवाह में बाधा की आशंका जताई गई। स्थानीय समुदायों के आजीविका स्रोतों पर गंभीर असर की बात रखी गई। समिति ने कहा कि विकास जरूरी है। पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों की कीमत पर विकास नहीं होना चाहिए। समिति के सदस्य भानु गुप्ता, मुकेश सोनी और अन्य सदस्यों ने सरकार से कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य को देखते हुए प्लांट को कम संवेदनशील वैकल्पिक स्थल पर लगाया जाए। विकास और संरक्षण में संतुलन बना रहे। समिति ने पारदर्शी पर्यावरणीय आकलन की मांग की। स्थानीय जनसुनवाई कराने की मांग रखी। विशेषज्ञों की राय को निर्णायक प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की मांग भी की।