अखिल विश्व गायत्री परिवार शांति कुंज हरिद्वार और राज्य सरकार के तत्वावधान में आयोजित होने वाली भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के लिए गायत्री शक्ति पीठ ओसियां ने स्थानीय विद्यालयों में पुस्तकों का वितरण किया। यह वितरण अभियान विद्यालयों से संपर्क स्थापित कर किया गया। टीचर और छात्रों को नैतिक शिक्षा का महत्व बताया इस अवसर पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य मनमोहन पुरोहित ने उपस्थित अध्यापकों और छात्रों को नैतिक शिक्षा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की प्रथम और देव संस्कृति है, जो 'जियो और जीने दो' के सिद्धांत पर आधारित है। मोबाइल पर ज्यादा निर्भरता पर जताई चिंता पुरोहित ने आधुनिक युग में युवा वर्ग के सोशल मीडिया और मोबाइल पर अत्यधिक निर्भरता पर चिंता व्यक्त की, जिससे उनमें सामान्य ज्ञान की कमी हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि समय बदल रहा है और पूर्वजों की पुरानी संस्कृति धीरे-धीरे वापस आ रही है। स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन के लिए अपनी संस्कृति को अपनाना आवश्यक है। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में भाग लेने की अपील इस दौरान परीक्षा संयोजक मोतीलाल सोनी ने सभी छात्रों से गायत्री परिवार द्वारा आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में भाग लेने का आग्रह किया। गायत्री परिवार के सांगीदान पालीवाल ने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा लिखित 'नव युग का संविधान' भी वितरित किया। ये रहे मौजूद कार्यक्रम में विद्यालय के राधेश्याम मेघवाल, गिरीराज पुरोहित, विकास वैष्णव, सत्यनारायण पालीवाल, बंशीलाल जयपाल, अशोक बिश्नोई, मीना जोशी सहित समस्त अध्यापक और छात्र उपस्थित थे।