पी. कृष्ण कुमार, अपने समय में राजस्थान के स्टार क्रिकेटर रहे। पिछले 9 साल से राजस्थान से बाहर की टीमों को कोचिंग दे रहे हैं। इनके सिखाए कई क्रिकेटर्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इतना ही नहीं जम्मू-कश्मीर को 67 साल में पहली बार रणजी चैम्पियन बनाने में भी इनकी अहम भूमिका रही। राजस्थान का यह अॉलराउंडर जम्मू-कश्मीर की रणजी टीम का बॉलिंग कोच था। खास बात यह है कि बॉलिंग के दम पर ही जम्मू-कश्मीर पहली बार रणजी खिताब जीतने में सफल रही थी। सबसे मुश्किल था खिलाड़ियों में बॉन्डिंग बनाना मैं तीन साल से जम्मू-कश्मीर से जुड़ा हूं। इससे पहले छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में भी टीमों को कोचिंग दे चुका हूं। जम्मू-कश्मीर टीम से जब मैं, अजय शर्मा (चीफ कोच) और दिशांत याग्निक (फील्डिंग कोच) जुड़े उस समय गुटबाजी बहुत थी। जम्मू वाले और कश्मीर वाले दो धड़े थे। हमने सबसे पहले इस गुटबाजी को खत्म किया। सबको साथ लेकर आए। खिलाड़ियों में आपसी बॉन्डिंग बढ़ी तो प्रदर्शन भी अच्छा होने लगा। हां, हमें मिथुन मन्हास का पूरा सपोर्ट था। किसी तरह का कोई प्रैशर नहीं था। यही कारण रहा कि हम टीम के खिलाड़ियों से बेस्ट निकलवा सके। जो बेस्ट था, उसे ही खिलाया। जरूरत पड़ने पर इंडिया खेल रहे खिलाड़ी तक को टीम से बाहर रखा। आखिर तीन साल की मेहनत रंग लाई। पहली बार जम्मू-कश्मीर टीम चैम्पियन बनी। आकिब नबी ने 60 विकेट लिए थे। पारस डोगरा एकमात्र प्रोफेशनल खिलाड़ी और कप्तान थे। प्रदेश के लिए 70 प्रथम श्रेणी और 51 लिस्ट-ए मैच खेले अपने क्रिकेट सर्कल में मोनू के नाम से जाने जाने वाले पी कृष्ण कुमार ने 15 साल राजस्थान के लिए क्रिकेट खेला। 70 प्रथम श्रेणी और 51 लिस्ट-ए मैच खेले। वे कहते हैं, ‘अब मेरा सिर्फ एक ही सपना है। जिस राजस्थान के लिए मैंने इतने लम्बे समय तक क्रिकेट खेला है, उसे अपनी कोचिंग में रणजी चैम्पियन बनाना चाहता हूं। मेरे लिए इससे बड़ी उपलब्धि कुछ नहीं होगी।’