राजस्थान के बालोतरा जिले में बन रही पचपदरा रिफाइनरी अब सिर्फ एक औद्योगिक प्रोजेक्ट नहीं रही, बल्कि यह देश से लेकर विदेशों तक बसे राजस्थानी समुदाय की उम्मीदों का केंद्र बन चुकी है। रेगिस्तान की धरती पर खड़ा हो रहा यह पेट्रोकेमिकल हब जहां पश्चिमी राजस्थान की तस्वीर बदलने वाला है। वहीं, इसकी हर हलचल पर विदेशों में बैठे प्रवासी राजस्थानी भी नजर बनाए हुए हैं। करीब 80 हजार करोड़ रुपए के इस मेगा प्रोजेक्ट को गुजरात के जामनगर मॉडल की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। 9 मिलियन मीट्रिक टन सालाना क्षमता वाली यह रिफाइनरी न केवल तेल शोधन करेगी, बल्कि पेट्रोकेमिकल सेक्टर में भी बड़ा उत्पादन केंद्र बनेगी। प्लास्टिक, केमिकल और पैकेजिंग जैसी सहायक इंडस्ट्रीज के लिए यह एक पूरा इकोसिस्टम तैयार करेगी। प्रवासी राजस्थानी क्यों जुड़े हैं इस प्रोजेक्ट से? विदेशों में बसे राजस्थानी समुदाय के लिए यह प्रोजेक्ट सिर्फ विकास नहीं, बल्कि “घर की पहचान” से जुड़ा हुआ है। प्रवासी संगठन राना (RANA) के अध्यक्ष प्रेम भंडारी का कहना है कि यह रिफाइनरी राजस्थान को ग्लोबल इंडस्ट्रियल मैप पर स्थापित कर सकती है।
उनके अनुसार, यह प्रोजेक्ट विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा। राजस्थान की ब्रांड वैल्यू बढ़ाएगा। प्रवासी निवेशकों के लिए नए अवसर खोलेगा। इसी वजह से राना जैसे संगठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्घाटन कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेलिब्रेट करने की तैयारी कर रहे थे। आग ने बढ़ाई ग्लोबल चिंता 20 अप्रैल को रिफाइनरी के अहम यूनिट में लगी आग ने इन उम्मीदों को झटका दिया। खास बात यह रही कि यह हादसा उद्घाटन से ठीक पहले हुआ, जिससे न केवल राज्य बल्कि विदेशों में भी इस प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठे। प्रेम भंडारी ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि इतने बड़े और हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट में इस तरह की घटना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पश्चिमी राजस्थान को क्या होगा फायदा? पचपदरा रिफाइनरी का असर सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं रहेगा। यह पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। जोधपुर, पाली और बालोतरा जैसे शहरों में औद्योगिक विकास तेज होगा। 10 हजार से ज्यादा प्रत्यक्ष और 40 हजार अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनेंगे। पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक उद्योगों को सस्ता कच्चा माल मिलेगा। लॉजिस्टिक्स, रेलवे और एयर कनेक्टिविटी में सुधार होगा। RIICO के जरिए नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित होंगे। यह पूरा क्षेत्र एक “इंडस्ट्रियल कॉरिडोर” में बदल सकता है, जिसका असर आने वाले दशकों तक दिखाई देगा। लागत, देरी और अब हादसा इस प्रोजेक्ट की लागत 43,129 करोड़ रुपए से बढ़कर 79,459 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। पहले ही देरी और राजनीतिक विवादों से घिरे इस प्रोजेक्ट को अब आग की घटना ने नई चुनौती दे दी है। राज्य के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से प्रवासी समुदाय ने मांग की है कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो। राना (RANA) के अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने कहा कि उद्घाटन से ठीक पहले हुआ यह हादसा न सिर्फ स्थानीय स्तर पर, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भरोसे को झटका देने वाला है। अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकार और प्रबंधन पर है कि वे इस स्थिति को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ संभालें, क्योंकि यह प्रोजेक्ट केवल राजस्थान का नहीं, बल्कि दुनिया भर में बसे हर राजस्थानी की उम्मीदों और गर्व से जुड़ा हुआ है।”
अक्सर देखा गया है कि इस प्रकार की घटनाओं के बाद जांच आयोग या न्यायिक जांच बैठाई जाती है, जिसमें काफी समय और धन खर्च होता है तथा रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाती है, लेकिन दुर्भाग्यवश उन रिपोर्टों पर बहुत कम कार्रवाई होती है।हादसे की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए जो भी जिम्मेदार पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें दंडित किया जाए।