पाली के पुनायता औद्योगिक क्षेत्र स्थित ट्रीटमेंट प्लांट-6 (जेडएलडी) को लेकर सीईटीपी फाउंडेशन और प्लांट संचालक वेंसर कंस्ट्रक्शन कंपनी के बीच विवाद बढ़ गया है। कंपनी ने फाउंडेशन के पांच पदाधिकारियों के खिलाफ सदर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। कंपनी ने प्लांट में जबरन प्रवेश करने, डीवीआर ले जाने और कर्मचारियों के साथ बदसलूकी के आरोप लगाए हैं। वहीं, फाउंडेशन के सचिव संदीप मेहता ने मुकदमे को झूठा बताते हुए कंपनी पर प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चलाने का आरोप लगाया है। प्लांट में प्रवेश कर डीवीआर ले जाने का आरोप वेंसर कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्लांट हेड दीपक कुमार ने सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। रिपोर्ट के अनुसार, सीईटीपी फाउंडेशन के सचिव संदीप मेहता, कोषाध्यक्ष राहुल मेहता, डायरेक्टर विनय बंब और महावीर जैन सहित पांच पदाधिकारी 19 अक्टूबर को बिना सूचना दिए प्लांट पहुंचे थे। कंपनी का आरोप है कि पदाधिकारी सीसीटीवी निगरानी कक्ष में गए और वहां से डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) डिस्कनेक्ट कर अपने साथ ले गए। इसके बाद प्लांट के सीसीटीवी कैमरों ने काम करना बंद कर दिया। कर्मचारियों को बाहर निकालने का आरोप कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, 19 अक्टूबर की शाम करीब 6 बजे प्लांट के बाहर एक बोर्ड लगाया गया। इस पर संपत्ति को सीईटीपी फाउंडेशन की बताते हुए अध्यक्ष और सचिव की अनुमति के बिना प्रवेश नहीं करने की बात लिखी गई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि शाम करीब 6:30 बजे कर्मचारियों को एक-एक करके प्लांट से बाहर निकाला गया। इस दौरान उनकी तलाशी लेने और शारीरिक जांच करने की बात भी कही गई है। 8 अक्टूबर को 50-60 लोगों के पहुंचने का भी जिक्र कंपनी ने रिपोर्ट में 8 अक्टूबर की एक अन्य घटना का भी उल्लेख किया है। आरोप है कि उस दिन सीईटीपी फाउंडेशन के एक डायरेक्टर के नेतृत्व में करीब 50 से 60 लोग प्लांट पहुंचे थे और कर्मचारियों के सामने धमकाया था। मामला दर्ज होने के बाद शुक्रवार को सदर थाना प्रभारी कपूराराम पुलिस टीम के साथ प्लांट पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने घटना के समय मौके पर मौजूद दो कर्मचारियों के बयान भी लिए। सात महीने बाद भी पूरी क्षमता से नहीं चला प्लांट: मेहता सीईटीपी फाउंडेशन के सचिव संदीप मेहता ने कंपनी की ओर से दर्ज करवाए गए मुकदमे को झूठा बताया। उनका कहना है कि कंपनी के साथ हुए अनुबंध के अनुसार सात महीने बाद भी प्लांट निर्धारित क्षमता से नहीं चल रहा था। इसके कारण औद्योगिक इकाइयों के सामने बंद होने जैसे हालात पैदा हो गए थे। मेहता ने आरोप लगाया कि फाउंडेशन के पदाधिकारियों और डायरेक्टर्स ने कंपनी के प्रतिनिधियों को कई बार चर्चा के लिए बुलाया, लेकिन वे नहीं आए। बिजली बिल चुकाने की जिम्मेदारी भी कंपनी की थी, जिसका भुगतान नहीं किया जा रहा था। उनके अनुसार, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक और विभिन्न एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों से कानूनी राय लेने के बाद सामूहिक रूप से कंपनी को हटाने का निर्णय लिया गया था। फाउंडेशन पर 7.8 करोड़ रुपए बकाया वेंसर कंस्ट्रक्शन कंपनी का दावा है कि प्लांट संचालन के बिलों के अनुसार सीईटीपी फाउंडेशन पर करीब 7.8 करोड़ रुपए बकाया हैं। कंपनी के मुताबिक, भुगतान मांगने पर फाउंडेशन ने समझौता रद्द कर प्लांट पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की। कंपनी का यह भी दावा है कि जेडएलडी प्लांट को दुरुस्त करने में उसने 12 से 15 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। कंपनी के अनुसार, वह प्लांट संचालन से जुड़े मुद्दों पर फाउंडेशन के पदाधिकारियों से लगातार चर्चा करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसके ईमेल पर ध्यान नहीं दिया गया और सीधे टर्मिनेशन नोटिस जारी कर दिया गया। फिलहाल प्लांट को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। कंपनी ने जहां पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है, वहीं फाउंडेशन के सचिव ने कंपनी के कामकाज और प्लांट की क्षमता पर सवाल उठाए हैं।