पाली के प्राचीन सोमनाथ और गोपीनाथ मंदिर में 151 सालों से भगवान नृसिंह का अवतरण दिवस मनाने की परंपरा गुरुवार को भी निभाई गई। नृसिंह जयंती महोत्सव के मौके पर नृसिंह अवतार के बाद मलूका मेला आयोजित किया गया। इसमें काले कपड़े पहन मलूका(हिरण्यकश्यप) बने युवक ने शहरवासियों पर सोटे बरसाए। युवा बचने के लिए इधर-उधर भागते दिखाई दिए। मेले को देखने आए सैकड़ों शहरवासियों ने इस नजारे को अपने मोबाइल में कैद किया। दरअसल, जिले के प्राचीन सोमनाथ मंदिर और गोपीनाथ मंदिर में नृसिंह जयंती महोत्सव का आयोजन किया गया। इसके बाद मलूका मेला भी आयोजित किया गया। इस मौके पर मलूका ने लोगों पर सोटे से वार किए, तो बचने के लिए शहरवासियों ने उसे रुपए भी दिए। आयोजकों ने बताया कि करीब 151 सालों से इस परंपरा को निभाया जा रहा है। आयोजन में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी पहुंचे और भगवान के जयकारे भी लगाए। 151 साल से चली आ रही परंपरा सोमनाथ मंदिर के पुजारी ललित दवे ने बताया- प्राचीन सोमनाथ मंदिर में 151 सालों से भगवान नृसिंह का अवतरण दिवस मनाया जा रहा है। हिरण्यकश्यप रूपी मलुका के अत्याचारों का स्वांग शुरू होगा। मलूका के वेश धरे युवा मंदिर के बाहर प्रदर्शन करते है। सूर्यास्त से पूर्व भगवान सोमनाथ की महाआरती होती है। इसके बाद ठीक सूर्यास्त के समय मंदिर के गर्भगृह से भगवान नृसिंह के अवतरण, भक्त प्रहलाद को बचाने और हिरण्यकश्यप रूपी मलूका के मर्दन(मारने) की जीवंत झांकी का प्रदर्शन किया जाता है। उन्होंने बताया- भक्त प्रहलाद को बचाने के लिए और ब्रह्मदेव से मिले वरदान के अभिमान में अत्याचारों की पराकाष्ठा पर उतर आए। दैत्यराज हिरण्यकश्यप के वध के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार धारण किया था। नरसिंह जयंती के अवसर पर सोमनाथ मंदिर में इसी प्रसंग को जीवंत किया जाता है। भगवान नरसिंह द्वारा दैत्यराज हिरण्यकश्यप रूपी मलूका के मर्दन की जीवंत झांकी का प्रदर्शन किया गया।