करीब 20 साल से तकनीकी खामियों के कारण अधूरी रह रही पांचना बांध की सिंचाई व्यवस्था आखिरकार गुरुवार को पूरी तरह पटरी पर लौटती नजर आई। 30 फीट गहरे पानी में लगातार आठ दिन तक चले कठिन अंडरवॉटर ऑपरेशन और करीब 24 लाख रुपए की मरम्मत के बाद पांचना बांध के स्लूस गेटों का सफल टेस्ट रन किया गया। अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों की मौजूदगी में गेट खोलकर कमांड क्षेत्र की नहरों, गुडला-पांचना लिफ्ट सिंचाई परियोजना, और गंभीरी नदी के बहाव क्षेत्र में पानी छोड़ा गया। पूरे जल निकासी तंत्र की तकनीकी जांच भी सफल रही। इसके साथ ही करीब दो दशक बाद कमांड क्षेत्र में नियमित सिंचाई बहाल होने की उम्मीद मजबूत हो गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशन में गुरुवार को जल संसाधन विभाग ने पांचना बांध के पूरे जल निकासी सिस्टम का व्यापक तकनीकी परीक्षण कराया। सुबह संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया, जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता डी.के. अग्रवाल, करौली कलेक्टर अक्षय गोदारा, सवाई माधोपुर कलेक्टर कानाराम, पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल, विभागीय अधिकारियों, और कमांड क्षेत्र व पांचना-गुडला संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूजा-अर्चना के बाद स्लूस गेट एक-एक कर खोले गए। गेट खुलते ही कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ा गया। इसके साथ ही गैर-कमांड क्षेत्र के लिए विकसित गुडला-पांचना लिफ्ट सिंचाई प्रणाली और गंभीरी नदी की ओर जल निकासी के लिए बने गेटों का भी सफल परीक्षण किया गया। जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीम ने सभी गेटों, मैकेनिकल सिस्टम, और जल निकासी तंत्र का निरीक्षण कर उनकी कार्यक्षमता की पुष्टि की। संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नियमित जलापूर्ति शुरू करने से पहले सभी तकनीकी व्यवस्थाएं पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु रखी जाएं। सफल परीक्षण के बाद कमांड क्षेत्र एवं पांचना-गुडला संघर्ष समिति के अशोक सिंह धावाई सहित अन्य प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का करीब 20 साल पुरानी समस्या का शांतिपूर्ण समाधान कराने के लिए आभार जताया। ग्राम उत्थान समिति के अध्यक्ष रघुवीर मीणा ने कहा कि नियमित जलापूर्ति शुरू होने से कमांड क्षेत्र में हर वर्ष 200 करोड़ रुपए से अधिक के कृषि कारोबार का रास्ता खुलेगा। 6 जुलाई को तकनीकी खामी के कारण पूरा जिला आंदोलन और जाम की चपेट में आ गया था। इस बार प्रशासन ने केवल गेटों की मरम्मत कर संतोष नहीं किया। विशेषज्ञों से अंडरवॉटर ऑपरेशन कराया। पूरे मैकेनिकल सिस्टम को बदला। टीम को दोबारा स्टैंडबॉय पर बुलाया। हाई-लेवल मॉनिटरिंग की। फिर अधिकारियों व किसान प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूरे जल निकासी तंत्र का परीक्षण किया। यह सिर्फ गेट खोलने का कार्यक्रम नहीं था। यह प्रशासन की विश्वसनीयता की भी परीक्षा थी। आश्वासन पर खुलवाए थे जाम, प्रशासन ने निभाया अपना वादा दरअसल, 6 जुलाई को करीब 20 वर्ष बाद जब पांचना बांध से पानी छोड़ा गया था, तब स्लूस गेटों की तकनीकी खराबी के कारण नहरों में पर्याप्त दबाव से पानी नहीं पहुंच पाया था। इसके बाद जिलेभर में किसानों का आंदोलन, चक्काजाम और सामाजिक तनाव की स्थिति बन गई थी। हालात इतने बिगड़े कि प्रशासन को कानून-व्यवस्था संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। आंदोलन के बाद कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने किसानों से वार्ता कर 7 से 10 दिन में गेटों की मरम्मत कर दोबारा जलापूर्ति शुरू कराने का भरोसा दिया था। 30 फीट गहरे पानी में चला था सबसे कठिन ऑपरेशन मंत्रियों के निर्देश के बाद मथुरा, देवली और मुंबई से विशेषज्ञ डाइवर्स और तकनीशियन बुलाए गए। मुंबई की विशेषज्ञ टीम ने आधुनिक अंडरवॉटर उपकरणों के साथ लगातार आठ दिन तक अभियान चलाया। दो-दो टीमों ने 50-50 मिनट की शिफ्ट में 30 फीट गहरे पानी में उतरकर काम किया। करीब 17 घंटे ऑपरेशन चला। इस दौरान दोनों स्लूस गेटों की तीन-तीन लोहे की रॉड, तीन-तीन स्टील प्लेटें, कपलिंग, सॉकेट, बोल्ट सहित पूरा मैकेनिकल हार्डवेयर बदल दिया गया। मरम्मत पर करीब 24 लाख रुपए खर्च हुए। काम पूरा होने के बाद कई बार गेटों को खोल-बंद कर परीक्षण किया गया।