उमकली को ग्राम पंचायत का दर्जा देने की मांग पर ग्रामीणों का गुस्सा कम नहीं हुआ है। भास्कर में शुक्रवार को खबर प्रकाशित होने के बाद दोपहर को पटवारी मरुधर सिंह गांव पहुंचे तो ग्रामीणों ने नाराजगी जाहिर की। ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे तहसीलदार के बुलावे पर कार्यालय नहीं जाएंगे। अब अधिकारी गांव आकर उनकी बात सुनें और समाधान करें। उमकली, सरगरों की ढाणी और कुंडली चारणान के ग्रामीणों ने दोहराया कि जब तक उमकली को ग्राम पंचायत का दर्जा वापस नहीं मिलेगा, वे मतदान नहीं करेंगे। पटवारी मरुधर सिंह ने ग्रामीणों को बताया कि तहसीलदार ने बातचीत के लिए कार्यालय में बुलाया है। ग्रामीणों का कहना था कि वे मुख्यमंत्री, कलेक्टर और अन्य कार्यालयों में कई बार ज्ञापन दे चुके हैं। अब बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाना चाहते। प्रशासन को गांव आकर उनसे बातचीत करनी चाहिए। बता दें कि तीनों गांवों के कुल 1,560 मतदाताओं ने बहिष्कार का ऐलान किया है। वैकल्पिक तौर पर कुलथना ग्राम पंचायत में यथास्थिति रखने या उमकली और देवान की अलग-अलग पंचायतें बनाने का सुझाव भी दिया है। ग्रामीणों ने गुरुवार को माताजी के मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में एकत्र होकर चुनाव बहिष्कार की शपथ ली थी। नई ग्राम पंचायत के शुरुआती प्रस्ताव में उमकली को मुख्यालय बनाने की बात थी। प्रस्ताव में उमकली के साथ देवान, भिंडर और कुंडली चारणान को शामिल किया गया था। 16 अक्टूबर को प्रकाशित समाचार।