पिंजरापोल गोशाला में अनुदान के नाम पर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। महालेखाकार की अनुपालना ऑडिट में खुलासा हुआ है कि गोशाला ने रिकॉर्ड में 4858 गोवंश दिखाए, जबकि मौके पर 3551 ही मिले। 1307 मृत गोवंश, अपंजीकृत टैग और 93 डुप्लीकेट एंट्री से गोवंश की संख्या बढ़ाकर वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 में 2.21 करोड़ रु. सहायता राशि अधिक उठा ली। गोपालन विभाग ने जांच शुरू कर दी है। दरअसल, गोशाला गोवंश को INAPH एप पर पंजीकृत किए बिना ही अनुदान ले रही थी। इसी के चलते ऑडिट की गई। ऑडिट में यह भी पाया गया कि कई पशु अनुदान के लिए जरूरी 120/150 दिन तक गोशाला में रहे ही नहीं। खास बात यह है कि बजट 2025-26 में सरकार ने गोशाला अनुदान राशि में 15% बढ़ोतरी की है। अब बड़े गोवंश के लिए 50 और छोटे गोवंश के लिए 25 रुपए रोज मिलेंगे। पहले यह राशि 42 व 22 रुपए थी। हालांकि यह लाभ उन्हीं गोशालाओं को मिलेगा, जिनका 100% डेटा पोर्टल पर प्रमाणित होगा। शिकायतकर्ता ने कहा- गोशाला का व्यावसायिक उपयोग हो रहा बजट 2025-26 में सरकार ने गोशाला अनुदान राशि 15% बढ़ाई, बड़े गोवंश के 50 और छोटे के 25 रुपए रोज मिलेंगे हाईकोर्ट अधिवक्ता मुनीश कुमार शर्मा ने गोपालन विभाग, मुख्य सचिव और देवस्थान विभाग को विधिक नोटिस भेजकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि दान राशि का उपयोग पशुओं की देखभाल के बजाय परिसर में सुरभि सदन और सत्संग भवन बनाने में किया गया। अब इनका व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। पिछले साल 1216 करोड़ अनुदान दिया प्रदेश में करीब 14 हजार गोशालाएं पंजीकृत हैं। इनमें से 3,300 से 3,500 गोशालाएं अनुदान लेती हैं। पारदर्शिता के लिए ‘भारत पशुधन एप’ यानी INAPH पर डेटा अपलोड अनिवार्य है। गोशाला प्रबंधन ने कहा- ऑडिट में खामियां सामने आईं गोशाला के महामंत्री शिवरतन चितलांग्या का कहना है कि ऑडिट के सवालों का जवाब दे दिया गया है। विभाग ने एप पर डेटा अपलोड करने को कहा था, लेकिन वह नहीं हो पाया। हमारे पास ऑपरेटर नहीं है। पशु कम मिलने की बात सामने आई थी, इसका कारण गलती से कई पशुओं की डबल टैगिंग होना है। गणना और ऑडिट में एक सप्ताह पहले जन्मे पशुधन को नहीं जोड़ा गया। मृत जानवरों का ऑडिट रिपोर्ट में उल्लेख नहीं है, इसलिए संख्या गड़बड़ मिली। रही बात पोखर और नाले के पानी से चारे की खेती की तो पूरे इलाके में नाले के पानी से ही खेती हो रही है। अनुदान बढ़ा, लेकिन सत्यापन कमजोर